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लखनऊ। सपा के सुप्रीमो और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट से करीब सवा करोड़ हिंदू वोटरों के नाम गायब होने के योगी आदित्यनाथ के दावे पर कई सवाल उठाए हैं। योगी आदित्यनाथ के दावों और अखिलेश के महा सवालों से यूपी की राजनीति में बवाल मच गया है।
पहले सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव की पोस्ट के अंश …
यूपी के पूर्व मुख्य उप्र के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट से 1.27 करोड़ हिंदुओं के नाम कट गये हैं। एमएलसी चुनाव में जिस प्रकार भाजपा के परंपरागत वोट घटे हैं, ये उसी हिसाब-अनुपात से निकाला गया बड़ा आँकडा है। उन्होंने मान लिया है कि उनके लगभग 1.27 करोड़ वोट घटनेवाले हैं, इसीलिए पहले से हार के कारण को साबित करने के लिए आधार बना रहे हैं। ये कोई सामान्य जानकारी नहीं है, जो उन्हें सड़क चलते मिल गई है। अगर ये आँकड़ा चुनाव आयोग से लीक हुआ है तो उप्र के मुख्यमंत्री को भी दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘किसी’ को हटाने की माँग करनी चाहिए।
समान्य अंकगणित के हिसाब से इसका अर्थ ये निकलता है कि उप्र में विधानसभा की हर सीट पर भाजपा को लगभग 12700000/403=31514 वोटों का नुक़सान होने जा रहा है। मतलब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने लड़ने से पहले ही हथियार भी डाल दिया है और दिल्ली की अपनी ही सरकार पर आरोप भी लगा दिया है।
ये तो ख़ुद में अरबों का स्कैम है जो भाजपा राज में हो रहा है। जब डबल इंजन की सरकार है तो इसका मतलब तो ये हुआ कि दोनों की इस महाघोटाले में हिस्सेदारी है। ये आरोप लगाकर तो डबल इंजन को लेने के देने पड़ गए।
अखिलेश ने आगे कहा – कुल मिलाकर मुख्यमंत्री 2027 के चुनावों में अपनी हार की पृष्ठभूमि बनाने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री इसी बहाने डबल इंजन की टकराहट में इन आँकड़ों को उन्हें हराने की दिल्ली की साज़िश की बात की तरह भी धीरे से सरका दे रहे हैं, क्योंकि वोटर लिस्ट की गड़बड़ी का मतलब तो अपनी ही केंद्र में बैठी सरकार को ही कटघरे में खड़ा करना है। कुल मिलाकर सच ये है कि भारतीय जनता पार्टी अब ‘हारती जनता पार्टी’ बन गई है।
सबसे बड़ा महा-सवाल ये है कि ये सब खुलासा मुख्यमंत्री ने ‘दिल्ली चलो’ : वोट बचाओ-देश बचाओ की महारैली के ठीक एक दिन पहले ही क्यों किया … कुछ तो गड़बड़ है।
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