- अफसरों को कौन याद दिलाए … पंचवर्षीय योजना नहीं है ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण का प्रोजेक्ट
- तेजी से काम होने पर 4 महीने में पूरा हो सकता है प्रोजेक्ट
- 6 महीने से सौंदर्यीकरण कार्य में ढिलाई, रुक रुक कर हो रहा है काम

भूमिपूजन के साढ़े 13 माह बाद ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण योजना बदहाल
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
स्वच्छता अभियान को लेकर दुर्ग नगर निगम भले ही सफलता के झंडे लहराने के दावे कर रहा हो, लेकिन विकास कार्यों के मामले में प्रशासनिक कसावट का निगम में कहीं अता-पता नहीं है। शहर में ठप पड़े विकास कार्यों पर न महापौर का ध्यान है न कमिश्नर कोई एक्शन ले रहे हैं। नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में से एक ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण की सुस्त चाल निगम की प्रशासनिक कमजोरी का एक बड़ा उदाहरण है। निगम कमिश्नर हरेश मंडावी समेत निगम अफसरों को याद रहना चाहिए कि ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण की योजना कोई पंचवर्षीय योजना नहीं है। इसे चंद महीनों में ही पूरा करना है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वरिष्ठ विधायक अरुण वोरा ने इस योजना को मंजूर कराने लगातार प्रयास किये। मुख्यमंत्री से मुलाकात कर योजना को जरूरी बताया। वोरा के प्रयासों के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने योजना को मंजूरी दी और 2 अक्टूबर 2020 को ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण योजना का वर्चुअल भूमिपूजन किया।
शहरवासियों को उम्मीद थी कि दुर्ग शहर में एक शानदार पिकनिक स्पॉट की सुविधा जल्द ही मिलेगी। मगर, एक साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद पिकनिक स्पॉट की सौगात तो दूर, ठगड़ा बांध के पुराने स्वरूप की भी दुर्गति हो चुकी है। रिटर्निंग वाल के निर्माण के अलावा बांध के बीच में कांक्रीट का आधा-अधूरा स्ट्रक्चर तैयार करने के सिवा यहां कोई काम नहीं हुआ है। विधायक अरुण वोरा कई बार बांध का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन निगम प्रशासन की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है।
ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण कार्य की सुस्त चाल के कारणों की पड़ताल करने पर पता चला कि ठेकेदार ने काम की रफ्तार कम कर दी है। वजह ये है कि ठेकेदार को करीब सवा करोड़ रुपए के बिल का भुगतान नहीं हुआ है। बिल का भुगतान न होने से ठेकेदार ने तेजी से काम करने से हाथ खड़े कर दिये हैं। गिने चुने लेबरों के जरिये यहां छिटपुट काम हो रहा है। अक्सर यहां काम पूरी तरह बंद रहता है।
दिलचस्प बात ये है कि सौंदर्यीकरण कार्य के लिए 14 करोड़ की स्वीकृति के बावजूद निगम के पास ठेकेदार को भुगतान करने के लिए फंड नहीं है। शुरुआत में योजना के लिए शासन से 5 करोड़ रुपए दिये गए थे, जिसका भुगतान ठेकेदार को किया जा चुका है। शेष 9 करोड़ रुपए का फंड शासन से लाने का काम निगम प्रशासन द्वारा नहीं किया गया।
निगम प्रशासन को शासन से शेष राशि लाने की व्यवस्था करने के लिए समय रहते जिन प्रक्रियाओं को पूरा करना था, उनमें काफी देर की गई। लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण अभी तक शासन से शेष फंड नहीं मिल पाया है। लापरवाही का ही नतीजा है कि निगम में जमा एफडी वगैरह के ब्याज की रकम से ठेकेदारों को भुगतान की अनुमति भी शासन से नहीं ली जा सकी है।
पूर्व निगम कमिश्नर इंद्रजीत बर्मन ने अपने कार्यकाल में ठगड़ा बांध सौंदर्यीकरण योजना को तेजी से पूरा कराने का प्रयास किया था। उन्होंने सौंदर्यीकरण कार्य की लगातार मॉनिटरिंग की और यहां के कार्यों को तेज गति से पूरा कराया। उनके ट्रांसफर के बाद योजना का काम कछुआ चाल से होने लगा। शहर की जनता पिकनिक स्पॉट की सौगात की बाट जोह रही है। लेकिन, नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
नतीजा … निल बटा सन्नाटा … शानदार योजना का बंटाधार …
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