द सीजी न्यूज
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भगवान राम के स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि हम भगवान राम को आदर्श के रूप में मानते हैं और हमेशा राम-राज्य के बारे में सोचते हैं। लेकिन भाजपा और आरएसएस ने बीते सालों में उन्हें एक योद्धा के तौर पर दिखाने की कोशिश की है। इसी तरह भक्ति, ज्ञान और शक्ति के प्रतीक हनुमान को क्रोधित रूप में चित्रित किया जा रहा है, जो कि समाज के लिए अच्छा नहीं है।

भूपेश बघेल ने कहा कि ‘ राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में हम मानते हैं। राम भद्र पुरुष हैं। राम हमारे लिए आदर्श हैं। इसलिए रामराज्य की कल्पना हम करते हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों से राम की छवि को बदलने की कोशिश की जा रही है। राम को युद्धक राम के रूप में दिखाने की कोशिश हो रही है। उसी तरह हनुमान, जो भक्ति, ज्ञान और शक्ति का समुच्चय हैं, उनकी भी छवि को बदलने की कोशिश की जा रही है। एक आक्रोशित हनुमान के रूप में दिखाया जा रहा है। ये समाज के लिए उचित नहीं हैं’।
एक राष्ट्रीय अखबार को इंटरव्यू देते हुए सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा और संघ दयावान, सौम्य भगवान श्रीराम को रैंबो और भगवान हनुमान को क्रोध के प्रतीक में बदलना चाहती है। पूरे भारत से अप्रैल के महीने में सांप्रदायिक हिंसा के समाचार मिले, लेकिन यह सब आगे नहीं चलेगा ,क्योंकि देश में कांग्रेस वापसी करेगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भगवान राम हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं, वह साकार और निराकार दोनों हैं। भारत ने भगवान राम को कई रूपों में स्वीकार किया है ,जिसमे कबीर के राम, तुलसी के राम तो कभी शबरी के राम भी दिखाई देते हैं। भगवान राम हर भारतीय की आत्मा में बसते हैं। भगवान राम सबके लिए अलग रूपों में हैं। किसान, आदिवासी , बुद्धिजीवी और भक्त उन्हें अलग-अलग रूप में देखते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रभु राम को महात्मा गांधी ने अपने भाव में देखा था, इसलिए उनके आखरी शब्द हे राम थे। बापू रघुपति राघव राजा राम का स्मरण करते थे। लेकिन आज बीजेपी और संघ एजेंडा ने तय करके मर्यादा पुरुषोत्तम राम को एक आक्रामक योद्धा के रूप में बदलकर उन्हें रैंबो बना दिया है। सीएम भूपेश ने आगे कहा कि हनुमान ज्ञान, नम्रता,भक्ति के प्रतीक हैं, अगर आप हनुमानजी के पुराने चित्रों को देखेंगे , तो वह ध्यान मुद्रा में हैं। लेकिन भाजपा और आरएसएस के पोस्टर में वह क्रोधी और आक्रामक तरीके से दर्शाये जा रहें है।
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