मुख्यमंत्री फिल्म के निर्देशक मनोज वर्मा और लेखक संजीव बख्शी से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भूलन कांदा के माध्यम से छत्तीसगढ़िया लोगों के मूल स्वभाव को सिनेमा में जिस तरह दिखाया गया है, वो काबिले तारीफ है। छत्तीसगढ़ की सुंदर संस्कृति का जो फिल्मांकन हुआ है, वो बहुत अच्छा हुआ है। लोक गीतों को जगह दी गई है औऱ छत्तीसगढ़ के गांवों को जिस तरह सिनेमा में उकेरा गया है उससे पता चलता है कि हमारे गांव कितने सुंदर हैं। उनमें एक-दूसरे के प्रति सहयोग की कितनी भावना है। किस तरह से सामूहिक रूप से गांव में निर्णय होता है और लोग एक दूसरे के साथ हर परिस्थिति में खड़े रहते हैं।

भूलन द मेज फिल्म छत्तीसगढ़ की ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित है और संजीव बख्शी के उपन्यास भूलन कांदा पर बनी है। इसे 67 वें नेशनल फिल्म अवार्ड से सम्मानित किया गया है और छत्तीसगढ़ सरकार ने भी इसे एक करोड़ रुपए की राशि से पुरस्कृत किया है।

अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर फिल्म के कलाकार भी काफी उत्साहित हुए। मुख्यमंत्री ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आप सभी लोगों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति को फिल्म के माध्यम से दिखाया है, उससे हमारे प्रदेश की सुंदर संस्कृति को दुनिया भर में पहचान मिल रही है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा के लिए यह काफी शुभ क्षण है। इस तरह का प्रयास भविष्य में और हो और छत्तीसगढ़ का सिनेमा अपनी विशिष्ट पहचान बनाए, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने फिल्म नीति भी तैयार की है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ी सिनेमा तेजी से बड़ा स्वरूप लेगा और सिनेमा के माध्यम से कला को नई ऊंचाई मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लिट्रेचर पर फिल्म बनाई गई है। यह भी काफी अच्छी बात है। छत्तीसगढ़ में सिनेमा को इससे नई ऊंचाई मिलेगी।