द सीजी न्यूज
करीब 104 घंटे 56 मिनट तक चले नान स्टाप रेस्क्यू आपरेशन के बाद जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल में गिरे 11 वर्षीय राहुल साहू को बचाने की मुहिम आखिरकार सफल हुई। छत्तीसगढ़ सहित देश के लाखों-करोड़ों लोग राहुल को सुरक्षित निकालने की कामना कर रहे थे। दुआओं, प्रार्थनाओं का दौर जारी रहा।
अब तक के देश के सबसे बड़े रेस्क्यू आपरेशन के बाद बीती रात राहुल को बाहर निकाला गया। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस आपरेशन की लगातार अपडेट लेते रहे और कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को लगातार निर्देश देते रहे। छत्तीसगढ़ सरकार ने राहुल को बचाने के रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी ताकत झोंक दी।
गांवों से लेकर शहरों तक लाखों करोड़ों लोगों ने राहुल की जिंदगी के लिए प्रार्थना की। पूजा-पाठ से लेकर भजन कीर्तन किये गए। सभी की मंगल कामनाओं से ईश्वर ने मूक-बधिर राहुल को नई शक्ति दी। राहुल अब सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। उसे बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया है।
राहुल के बोरवेल के गड्ढे में गिरने के बाद जिला प्रशासन के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और एसईसीएल के अधिकारी-कर्मचारी सहित कई विभागों, देश के कई हिस्सों से आई टीमों के सदस्य दिन-रात राहुल को बचाने के अभियान में लगातार जुटे रहे।
चट्टान काटने के काम में सबसे ज्यादा अवरोध आए। मंगलवार को शाम 7 बजे राहुल को निकालने का काम जब अंतिम दौर में था। पूरी टीम को अलर्ट कर दिया गया, गांव में तमाम लोग पूजा-पाठ करते हुए राहुल की सलामती की दुआ करने लगे, तब लगा कि राहुल को कुछ ही देर में बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन में बार-बार नए अवरोध आते रहे। कभी चट्टानों ने बाहर निकालने की उम्मीदों को कई घंटो के लिए रोक दिया, तो कभी बोरवेल में पानी का जलस्तर बढ़ने से रुकावट आती रही। मगर, चट्टानी इरादों ने न सिर्फ चट्टानों को काटा बल्कि राहुल को बाहर निकालने के अभियान को कामयाबी के मुकाम तक पहुंचा दिया।
इससे पहले सोमवार को रात 11 बजे से सुरंग से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। मलबा हटाने के बाद लगा कि सोमवार को रात 12 बजे तक राहुल को बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन पत्थर को तोड़ने या काटने से राहुल को चोट लगने की आशंका के कारण यह ऑपरेशन धीरे-धीरे चलाया गया। पत्थरों की धीरे-धीरे तोड़ा गया ताकि, राहुल को किसी तरह का नुकसान न हो। पूरी रात तक यह आपरेशन जारी रहा।
राहुल को बोरवेल से निकालने के लिए बोर के समानांतर 60 फीट गड्ढा खोदा गया। इसके बाद राहुल तक पहुंचने के लिए 3 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई। सुरंग के रास्ते में चट्टान आने के कारण इस रेस्क्यू अभियान में काफी समय लगा।
शुक्रवार को दोपहर के समय बोरवेल में गिरा था राहुल, दिन रात चला रेस्क्यू मिशन
शुक्रवार को दोपहर बाद मालखरौदा ब्लाक के ग्राम पिहरीद में घर के पीछे खोदे गए बोरवेल में राहुल साहू गिर गया था। करीब 65 फीट नीचे बोरवेल में राहुल फंस गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार इस अभियान पर नजर बनाए रहे। उन्होंने दो बार कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला के अलावा राहुल के परिजनों से भी बातचीत की। राहुल साहू को बचाने के लिए शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी। कलेक्टर, एसपी से लेकर अन्य अफसर पिहरीद में अभियान के दौरान वहीं जमे रहे। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ सहित सेना के जवान दिन-रात मेहनत कर राहुल को सही सलामत बाहर निकालने कड़ी मशक्कत में जुटे रहे।
अभियान के तहत बोरवेल से कुछ दूरी पर खोदाई का काम किया गया। रविवार की शाम तक 63 फीट गहरा गड्ढा खोदा जा चुका था। इसके बाद राहुल तक पहुंचने के लिए टनल बनाने के दौरान बीच में चट्टान आने के कारण काम में काफी रुकावट आई। सुरंग बनाने के लिए खदान में रेस्क्यू करने वाली कुसमुंडा और मनेन्द्रगढ़ के एसईसीएल के अधिकारियों को बुलाया गया। कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला इन अधिकारियों से लगातार चर्चा करते रहे।
स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट रही
जिला प्रशासन द्वारा आपात चिकित्सा व्यवस्था की गई। सीएमएचओ सहित डॉक्टर की टीम मौके पर मौजूद रहे। घटनास्थल पर ऑक्सीजन के पर्याप्त सिलेंडर रखे गए हैं। जिंदल रायगढ़ व अपोलो अस्पताल को अलर्ट किया गया।
पहली बार में इसलिए फेल हो गया रोबेट
गुजरात से आए जिस रोबेट पर प्रशासन को पूरा विश्वास था, वह रोबेट रेस्क्यू अभियान में पहली कोशिश में फेल हो गया। रोबेट एक्सपर्ट की टीम लगातार प्रयासों में जुटी रही। प्रशासन की टीम टनल व रोबेट दोनों दिशा में काम कर रही है। रोबेट एक्सपर्ट गुजरात के महेश अहीर ने बताया कि पहली बार जब रोबेट को डाला तब राहुल ने कोई रिस्पांस नहीं दिया। जहां राहुल बैठा है, वहां पर पत्थर भी है। इसलिए रोबेट पूरी तरह से राहुल को पकड़ नहीं पाया। अगर राहुल उठ जाता तो रोबोट उसे पकड़ लेता। राहुल को उठाने का प्रयास किया गया।
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