• जनजातीय संस्कृति को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने का छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का काम मील का पत्थर साबित होगा
  • आदिवासियों का वैश्विक मंच बना छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल
  • 27 राज्य, 6 केन्द्र शासित प्रदेश और 7 देशों के 1500 से अधिक कलाकार हुए शामिल
  • विभिन्न देशों एवं राज्यों के नर्तक दलों के कलाकारों ने किया आकर्षक मार्चपास्ट 

द सीजी न्यूज डॉट कॉम

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने, संवारने और आगे बढ़ाने के लिए अभिनव कार्य कर रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सिर्फ राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय वर्ग का सम्मान है। जनजातीय वर्ग वर्षाें से शोषित रहा है। सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा रहा है। उसे आगे बढ़ाने के लिए यह भव्य आयोजन पूरे देश के लिए एक संदेश है।

सोरेन ने कहा कि यदि हम सब चाहें तो यह जनजातीय वर्ग हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकता है, आगे बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का जनजातीय वर्ग के प्रति यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा। इससे पहले राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का शुभारंभ झारखण्ड के मुख्यमंत्री व कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हेमंत सोरेन ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की। कार्यक्रम में राज्यसभा के पूर्व सांसद बी.के. हरिप्रसाद, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, युगाण्डा व फिलीस्तीन के कॉउंसलर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे।

मुख्य अतिथि हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि आज भौतिकवादी युग में जनजातीय समाज अपनी सभ्यता, संस्कृति को बचाने में लगा है। छत्तीसगढ़ सरकार के इस कार्यक्रम से जनजाति वर्ग में आशा जगेगी। उन्हें ताकत और ऊर्जा मिलेगी। यहां आदिवासियों की कला, संस्कृति के साथ-साथ उनके उत्पाद के प्रदर्शन और विक्रय का मेला लगा है। छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासियों की बेहतरी और उनके कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का अध्ययन करते हैं और अपने राज्य में भी बदलाव की कोशिश करते हैं। सोरेन ने छत्तीसगढ़ राज्य में लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी और वनवासियों को तेंदूपत्ता से लेकर लघु वनोपजों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तारीफ की।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अनेकता में एकता हमारी ताकत और पहचान है। इसे जोड़ने और संजोने के लिए विश्व के आदिवासियों को एक मंच पर लाने यह आयोजन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ आज आदिवासियों के वैश्विक मंच के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। यह राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव का द्वितीय आयोजन है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में 42 जनजातियां और 5 विशेष पिछड़ी जनजातियां निवास करती है। इनकी जनसंख्या राज्य की कुल आबादी की एक-तिहाई है। सभी जनजातियों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है। उनकी बोली, उत्सव, नृत्य, देवी-देवता भी अलग-अलग है। महोत्सव के माध्यम से जनजातियों की सांस्कृतिक विभिन्नता, उनकी कला को एक मंच पर देखने और जानने का अवसर मिल रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में आदिवासी समुदाय की बेहतरी के लिए किए जा रहे कार्याें का उल्लेख करते हुए सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के नवनिर्माण में सबकी भागीदारी हो, सबका विकास हो, यह हमारी प्राथमिकता है।
भूपेश बघेल ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों और फैसलों से राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। छत्तीसगढ़ पहला राज्य हैं, जिसमें एक निजी उद्योग के लिए अधिग्रहित 4200 एकड़ जमीन आदिवासियों को वापस कराई है। वनवासियों को हम व्यक्तिगत और सामुदायिक पट्टे दे रहे हैं। गौठानों में दो रुपए किलो में गोबर की खरीदी की जा रही है। गोबर विक्रेता ग्रामीणों और पशुपालकों को इसकी एवज में 104 करोड़ रुपए करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। गौठानों में इंडस्ट्रियल पार्क, लघु उद्योग व कृषि आधारित उद्योग लगाने का काम जारी है।

रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 28 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक आयोजित होने वाले इस ‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव’ और छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में देश के 27 राज्यों और 6 केन्द्र शासित प्रदेशों के कलाकारों के साथ ही 7 देशों एस्वातीनी, नाइजीरिया, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, यूगांडा, माली और फिलिस्तीन से आए लगभग 1500 कलाकार भाग ले रहे हैं।