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प्रदेश युवा कांग्रेस चुनाव : फुस्सी पटाखों की बजाय ” फायर ब्रांड यूथ टीम ” बनाने की मुहिम : टॉप कांग्रेस लीडर्स ने बैक डोर से संभाला मोर्चा

  • एक-एक विधानसभा चुनाव पर नजर रख रही है टॉप लीडर्स की समानांतर टीम
  • निष्क्रिय रहे प्रदेश पदाधिकारियों और पूर्व जिला अध्यक्षों को फ्यूज बल्ब मानते हुए पार्टी के नेता सक्रिय युवाओं को जिताने की मुहिम में जुटे
  • सीएम के करीबी युवा नेताओं की अलग-अलग टीमों की कई बैठकें हो चुकी

द सीजी न्यूज ( हनीफ निजामी) 

छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस चुनाव की राजनीति गरमाने लगी है। निवर्तमान प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष कोको पाढ़ी का कार्यकाल, कोको की कार्यशैली और सक्रियता को लेकर पूरे प्रदेश में न सिर्फ युवा कांग्रेसियों, बल्कि वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में भी नाराजगी रही है। अध्यक्ष के रूप में कोको का पूरा कार्यकाल बिलो एवरेज माना गया है। यही वजह है कि अब कोको की विदाई के साथ नए सिरे से पॉवरफुल टीम तैयार करने संगठन चुनाव के लिए माईक्रो लेवल पर रणनीति बनाई जा रही है।

12 मई से सभी जिले और शहर में युवा कांग्रेस संगठन के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। सदस्यता अभियान के साथ ही वोटिंग भी होगी। एक माह तक सदस्यता के साथ वोटिंग के बाद नतीजे घोषित किये जाएंगे। अगले क्रम में प्रदेश स्तर पर युवा कांग्रेस के संगठन चुनाव होंगे। खास बात ये है कि चुनावी गहमागहमी सिर्फ युवा कांग्रेस के नेताओं तक सीमित नहीं है। इसमें सीनियर कांग्रेस लीडर भी शामिल हैं। विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी नेताओं ने विधानसभा स्तर से लेकर प्रदेश स्तर पर यूथ पॉवर को सेट करने की रणनीति बनाने का काम करना शुरू कर दिया है।

गहमागहमी का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में राजधानी रायपुर में वीआईपी रोड स्थित एक होटल में महापौर ऐजाज ढेबर ने पूरे प्रदेश भर के सौ से ज्यादा युवा कांग्रेस नेताओं की बैठक ली। बड़ी बात ये है कि इस बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हुए। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नवा रायपुर जा रहे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सिर्फ 5 मिनट के लिए बैठक में आए।

उन्होंने रायपुर सहित आसपास के इलाकों से आए युकां नेताओं को संबोधित किया। ज्यादा से ज्यादा मेंबर बनाने के निर्देश दिये। संगठन मामलों में सीएम के राईट हैंड कहे जाने वाले गिरीश देवांगन इस बैठक में करीब डेढ़ घंटे तक रहे। युकां चुनाव को लेकर गहरी मंत्रणा हुई। एक-एक शहर जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के चुनावों में यूथ पॉवर गेम का खाका तैयार किया गया।

एजाज ढेबर के साथ ही एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल चुके भिलाई के युवा विधायक देवेंद्र यादव, विनोद तिवारी जैसे दिग्गज युवा नेता भी युवा कांग्रेस चुनाव को लेकर मोर्चे पर डट गए हैं। पुराने खांटी युवा नेताओं को एक्टिव किया जा रहा है। हर विधानसभा क्षेत्र में युवाओं की सशक्त टीम तैयार करने प्रदेश के टॉप यूथ लीडर्स की पूरी टीम मोर्चे पर डटी है। प्रदेश कांग्रेस संगठन के कई पदाधिकारी भी पॉवरफुल यूथ टीम तैयार करने अलग-अलग जगह फील्डिंग जमा रहे हैं।    

दरअसल, यह सारी कवायद अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हो रही है। युकां संगठन को लेकर सीएम कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि अत्यधिक व्यस्तता के बावजूद मुख्यमंत्री की पैनी नजर युकां संगठन चुनाव पर है। इसके पीछे की वजह भी बड़ी है। वास्तव में कोको पाढ़ी का पूरा कार्यकाल शून्य बटा सन्नाटा साबित हुआ है। 2018 का विधानसभा चुनाव जीतने से पहले 15 साल से विपक्ष में रहने के बावजूद कोको पाढ़ी अपने कार्यकाल में कोई करिश्माई आंदोलन खड़ा नहीं कर सके।

हालत यह रही कि तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और तत्कालीन महामंत्री गिरीश देवांगन को संगठन का काम कराने कोको के साथ उनकी पूरी टीम को बार-बार पुशअप देना पड़ा। भूपेश की आक्रामकता और पैनेपन के साथ संगठन की रणनीति के कारण कांग्रेस पार्टी को सत्ता मिली। 2004 से दिसंबर 2018 तक विपक्ष में रहने के बाद सत्ता हासिल करने के संघर्ष में कोको की युवा कांग्रेस का कोई योगदान नहीं रहा। कोको की टीम में शामिल ज्यादातर पटाखे फुस्सी निकले। लिहाजा अब फायर ब्रांड युवा नेताओं की फौज तैयार करने की रणनीति बनाई गई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि नजरें सिर्फ अगले साल विधानसभा चुनाव पर नहीं है। 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में युवा कांग्रेस संगठन की भूमिका सशक्त और आक्रामक बनाने की तैयारी के साथ टीम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। टीम जितनी ताकतवर रहेगी भाजपा का सफाया उतने ही कारगर तरीके से हो सकेगा।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव की जंग में कांग्रेस की यूथ ब्रिगेड का जबर्दस्त रोल रहेगा। लिहाजा, कोको की टीम के फुस्सी पटाखों की बजाय तोप के गोले कहे जाने वाले युवा तुर्कों की टीम बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इसके लिए एक-एक विधानसभा क्षेत्र में अध्यक्ष की ताजपोशी पर नजर रखी जा रही है। युवा कांग्रेस चुनाव को लेकर बनी रणनीति का सार यही है –किसी भी हालत में फ्यूज बल्ब या फुस्सी पटाखे युकां संगठन में अध्यक्ष या दूसरा महत्वपूर्ण ओहदा हासिल न कर पाएं।  

हालांकि, ऊपरी तौर पर यही कहा जा रहा है कि स्थानीय विधायक की सहमति से ही युवा कांग्रेस अध्यक्ष को चुना जाए। ताकि, चुनाव में विधायक अपनी पसंद से बनाए गए अध्यक्ष की टीम के साथ मनचाहे तरीके से चुनाव लड़ सकें। लेकिन, एक समानांतर टीम यह भी देख रही है कि विधायकों का निर्णय सही है या नहीं। जिन क्षेत्रों में विधायकों की पसंद फुस्सी पटाखे हैं, उनकी काट के लिए समानांतर टीम फायर ब्रांड अध्यक्ष की ताजपोशी के लिए काम कर रही है। स्पष्ट निर्देश दिये गए हैं कि जिन लोगों को पूर्व में अध्यक्ष का ओहदा मिलने के बाद कार्यकाल निष्क्रिय रहा है, उन चेहरों को दोबारा मौका नहीं मिलना चाहिए। लिहाजा, समानांतर टीम ने हर जगह गोट बिठाने का काम भी शुरू कर दिया है।

देखना ये है कि सुप्रीम पॉवर के निर्देशों के बावजूद कितने फुस्सी पटाखे जीतकर आते हैं। एक बड़ा सवाल ये भी है कि प्रदेश युकां अध्यक्ष पद के लिए आकाश शर्मा का जितनी तेजी से उभरा है, और जितनी सहमति दिख रही है, क्या उसके पीछे कोई और हिडन एजेंडा भी है। क्या आकाश शर्मा ही प्रदेश के नए युकां अध्यक्ष होंगे … या पिक्चर में कोई नया ट्विस्ट आना बाकी है …                           

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