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भूपेश बघेल ने रावघाट को लेकर वर्षों तक किये संघर्ष को याद किया … उसी संघर्ष की बदौलत आज रावघाट से बीएसपी पहुंची है आयरन ओर की पहली खेप … पढ़िये डेढ़ दशक पहले भूपेश के अथक संघर्ष की कहानी …

कई साल तक रावघाट की खदान को निजी हाथों में देने के रमन सरकार के फैसले का विरोध करते हुए लगातार संघर्ष करते रहे भूपेश बघेल ने आज ये तस्वीरें फेसबुक पर शेयर की हैं। भूपेश ने उस दौर में निजी हाथों में खदान के चले जाने से बचाने के लिए संघर्ष को याद किया और आज से लौह अयस्क की पहली खेप पहुंचने पर भूपेश बघेल ने सभी को बधाई दी है।

दरअसल, रमन सरकार ने रावघाट को निजी हाथों में देने का फैसला कर लिया था। विपक्ष में रहते हुए भूपेश बघेल ने बीएसपी, सेल, सीबीआई से लेकर केंद्र सरकार तक इस मामले को बार-बार उठाया। भूपेश बघेल के तीखे तेवरों और लंबे संघर्षों के कारण रमन सरकार को फैसला पलटना पड़ा। बीएसपी को रावघाट खदान मिल गई। संघर्ष को सफलता मिली। 

(इस मामले में खनिज मामलों के जानकार वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद चावड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।… स्व. चावड़ा हमारे बीच नहीं रहे … रावघाट को बचाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा …स्व. चावड़ा को भावभीनी श्रद्धांजलि)

(वरिष्ठ पत्रकार जाकिर हुसैन की विशेष रिपोर्ट दो साल पहले द सीजी न्यूज में पोस्ट हो चुकी है। आज इसे दोबारा पोस्ट किया जा रहा है। दोबारा पढ़िये भूपेश के संघर्ष की वही रिपोर्ट … मामूली संशोधनों के साथ …)

द सीजी न्यूज 

भिलाई स्टील प्लांट के लिए छह दशक से लौह अयस्क की आपूर्ति कर रहे दल्ली राजहरा के खत्म हो रहे भंडारों के बीच अब रावघाट पर भिलाई का भविष्य टिका हुआ है। लंबी जद्दोजहद के बाद रावघाट में सारी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और रावघाट के अंजरेल ब्लॉक से औपचारिक खनन भी शुरू हो गया। आज बीएसपी को जिस सहजता से रावघाट में खनन का अवसर मिला है, और आज से जिस लौह अयस्क की पहली खेप भिलाई स्टील प्लांट को मिली है, उसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रख्यात खनन अधिवक्ता विनोद चावड़ा के अथक प्रयासों का बड़ा योगदान है।

सन 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निर्देश पर मध्यप्रदेश शासन ने अधिसूचना के माध्यम से रावघाट के समूचे लौह अयस्क भंडारों को भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे सार्वजनिक उपक्रम के लिए सुरक्षित कर दिया था। कालांतर में राजहरा के खत्म होते लौह अयस्क भंडारों के परिणामस्वरूप भिलाई इस्पात संयंत्र ने 1985 में तत्कालीन मध्यप्रदेश राज्य शासन के समक्ष रावघाट के संपूर्ण लौह अयस्क भंडारों की विधिवत मांग शुरू कर दी थी।

लेकिन सन 2003-04 तक तत्कालीन छत्तीसगढ़ राज्य शासन, भिलाई इस्पात संयंत्र, स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड, केंद्र सरकार के इस्पात मंत्रालय व खान मंत्रालय के तत्कालीन अधिकारियों और संबंधित विभागीय मंत्रियों की सामूहिक अदूरदर्शिता के कारण रावघाट के बेशकीमती लौह अयस्क भंडारों को निजी इस्पात कंपनियों को कानूनन आबंटित करने के लिए केन्द्र शासन द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जा चुका था। जिसके परिणामस्वरूप आयरन ओर के अभाव में भिलाई इस्पात संयंत्र का भविष्य खतरे में पड़ने लगा।

ऐसे में सन 2004-05 में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के ख्यातिनाम खनिज कानूनों के विधि विशेषज्ञ दुर्ग के पद्मनाभपुर निवासी विनोद चावड़ा ने शासन और निजी कंपनियों के इस अनैतिक गठजोड़ को दस्तावेजी प्रमाणों सहित तत्कालीन छत्तीसगढ़ विधानसभा के तत्कालीन उपनेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल के समक्ष उजागर किया।

इसके बाद भूपेश बघेल ने भिलाई इस्पात संयंत्र को बर्बाद करने के षड़यंत्र को खत्म करने का आंदोलन प्रारंभ कर दिया। इस आंदोलन की आग दुर्ग-भिलाई से फैलते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा और संसद तक फैलती गई। तत्कालीन इस्पात राज्यमंत्री अखिलेश दास ने 18 जून 2006 को भिलाई आकर पूरे षड़यंत्र की सीबीआई जांच कराने की घोषणा की।

इसके बाद आनन-फानन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने रावघाट के लौह अयस्क भंडारों को निजी कंपनियों को देने के अपने पूर्व के निर्णय को पूरी तरह से पलटते हुए लौह अयस्क भंडारों को वापस भिलाई इस्पात संयंत्र को देने की अनुशंसा केन्द्र सरकार को भेज दी। इस प्रकार प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके मित्र व खनिज विषयों के सलाहकार विनोद चावड़ा के अथक प्रयासों से रावघाट के लौह अयस्क भंडार बीएसपी को वापस मिल गए।

अधिवक्ता विनोद चावड़ा के इस अनूठे योगदान को देखते हुए 2 फरवरी 2007 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के उपनेता भूपेश बघेल ने उन्हें “रावघाट के योद्धा” के रूप में सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किया। इसके बाद भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने 14 नवंबर 2010 को व्यक्तिगत श्रेणी में इकलौते “भिलाई मित्र” का सम्मान दिया है। भिलाई का भविष्य सुरक्षित रखने के इस अनूठे योगदान के चलते 3 मई 2018 को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने संयुक्त रूप से विनोद चावड़ा को विधि के क्षेत्र में “सर्टिफिकेट आफ एक्सीलेंस” से रायपुर में सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिछले साल एक नवंबर 2020 को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर “बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान” से विनोद चावडा को राज्य स्तरीय सम्मान से सम्मानित किया। पिछले साल उनका निधन हो गया। 

रावघाट को प्राइवेट सेक्टर के हाथों में जाने से बचाने और भिलाई स्टील प्लांट को इसके खनन का अधिकार दिलाने में भूपेश बघेल और स्व विनोद चावड़ा के अथक संघर्षों को सलाम …

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