
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
प्रदेश स्तर पर कांग्रेस संगठन ने अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है, लेकिन दुर्ग शहर में कांग्रेस संगठन का हाल-बेहाल है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में बंफर जीत के बाद नगर निगम में 20 साल से काबिज भाजपा के दबदबे को उखाड़ फेंकने की कामयाबी के बाद अब दुर्ग शहर में कांग्रेस कैंप की ताकत दिनोंदिन कमजोर हो रही है। शहर कांग्रेस संगठन पूरी तरह निष्क्रिय है। नेताओं के बीच आपसी खींचतान की खबरें आ रही हैं।
हालत ये है कि प्रदेश कांग्रेस संगठन के निर्देश पर केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन-धरना जैसी खानापूर्ति करने के सिवा दुर्ग शहर कांग्रेस कमेटी द्वारा संगठन स्तर पर कोई काम नहीं किया जा रहा है। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस संगठन के बूथ गठन की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई है। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष गया पटेल संगठन के कामकाज में कसावट लाने की दिशा में कोई काम नहीं कर रहे हैं।
बूथ गठन की प्रक्रिया में पांच ब्लॉकों में से सिर्फ मध्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का कामकाज बेहतर है। बाकी चारों ब्लॉकों में बूथ गठन के लिए संगठन की गतिविधियों में सक्रियता बढ़ाना जरूरी है। इधर, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच श्रेय की लड़ाई और आपसी खींचतान के कारण भी पार्टी में अंतर्कलह लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, भाजपा संगठन के नेता धीमी लेकिन सधी चाल से विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। संगठन को मजबूत बनाने का काम शुरू हो गया है।
दुर्ग नगर निगम में कांग्रेस का वर्चस्व होने के बावजूद यहां के कामकाज का हाल बहुत बेहतर नहीं माना जा रहा है। महापौर धीरज बाकलीवाल ने सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान बनाई है, लेकिन उन्हें कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं के विरोधी तेवरों का सामना करना पड़ रहा है। एमआईसी सदस्य लगभग दो साल का अरसा बीतने के बावजूद अब तक एकजुट नहीं हो पाए हैं। कांग्रेस पार्षद दल में बिखराव की स्थिति है। पिछली सामान्य सभा में कांग्रेस पार्षदों के गुटों में बंटे होने का असर साफ दिखा। अधिकांश पार्षद विपक्ष को कड़ा जवाब देने की बजाय मौन साध लिया।
इधर, विधायक अरुण वोरा लगातार नगर निगम के कामकाज से खुश नहीं हैं और लगभग हर दिन निगम के कामकाज को लेकर लगातार निशाना साध रहे हैं। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद शहर की सरकार पर कांग्रेस विधायक के लगातार प्रहार करने से भाजपा नेता गदगद हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि वोरा जितना ज्यादा नगर निगम और महापौर पर गोले दागेंगे, शहर में कांग्रेस की उतनी ही फजीहत होगी। इसका सीधा फायदा भाजपा को ही मिलेगा। यही वजह है कि भाजपा नेताओं ने सुनियोजित रणनीति के तहत कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई पर फिलहाल मौन साध लिया है।
अगले चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी की तैयारी में जुटे भाजपा के एक सीनियर नेता ने द सीजी न्यूज डॉट कॉम से कहा कि शहर के कांग्रेस नेताओं की आपसी कलह से अगले चुनाव में भाजपा की राह आसान हो रही है। इस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। कांग्रेस के महापौर हैं। शहर की सरकार में कांग्रेस का बहुमत है। इसके बावजूद अगर सत्तापक्ष के विधायक विकास कार्य न होने की शिकायतें कर रहे हैं तो इसका फायदा भाजपा को ही मिलेगा।
भाजपा नेता ने आगे दावा किया कि विधायक अरुण वोरा और महापौर समेत एमआईसी मेंबर के बीच विभाजन की लकीर खिंच चुकी है। यह लकीर जितनी गाढ़ी और लंबी होगी, अगले चुनाव में भाजपा को उतना ही फायदा होगा। कांग्रेस नेताओं के बीच के अंतर्द्वंद को भाजपा नेता अगले चुनाव में पार्टी के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं। अब देखना ये है कि दिग्गज कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के निधन के बाद उनके मार्गदर्शनसे वंचित दुर्ग शहर में कांग्रेस के रणनीतिकार अगले चुनाव के लिए तैयारी शुरू करेंगे या आपसी कलह और बिखराव के साथ एक-दूसरे पर फायरिंग का दौर जारी रहेगा।
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