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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने राज्य के किसानों से गौठानों में गौ-माता के चारे की व्यवस्था के लिए पैरा-दान करने की अपील की है। किसानों के नाम जारी अपील में मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य के गांवों में पशुधन के संरक्षण व संवर्धन के लिए सुराजी गांव योजना के तहत गौठान बनाए गए है। इन गौठानों में गोधन के चारे और पानी का निःशुल्क प्रबंध गौठान समितियों द्वारा किया गया है। पशुधन के लिए गौठानों में सूखे चारे का पर्याप्त प्रबंध करने पैरा दान करना जरूरी है। धान की कटाई के बाद खेतों में पैरा जलाने की बजाय अपने गांव की गौठान समिति को पैरा-दान करें। इससे गोधन के लिए चारे का इंतजाम करने में समितियों को आसानी होगी। मुख्यमंत्री ने गोधन के चारे के लिए सर्वाधिक पैरा-दान करने वाले कृषक और सर्वाधिक पैरा एकत्र करने वाली गौठान प्रबंध समिति को विकासखंड स्तर पर पुरस्कृत और  सम्मानित करने के निर्देश भी दिए हैं।

कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. कमलप्रीत सिंह ने गौठानों में पैरा-दान से चारे की व्यवस्था के लिए कलेक्टरों को प्रेषित पत्र में कहा है कि राज्य में धान फसल की कटाई बहुतायत रूप से कंबाईन हार्वेस्टर से की जाती है। इसके कारण पैरा खेतों में फैल जाता है। खेतों में फैले हुए पैरा को आमतौर पर किसान भाई एकत्र करने की बजाय जला देते है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है और पशुओं के लिए चारा भी उपलब्ध नहीं हो पाता है। उन्होंने कलेक्टरों को धान फसल की कटाई के बाद खेतों में फैले हुए पैरे को सुविधानुसार एकत्र कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने  कहा है। इसके लिए कल्टीवेटर के पीछे तार जाली लगाकर या देशी यंत्र कोपर द्वारा खेतों में फैले हुए पैरा को एकत्र कराने और बंडल बनवाकर गौठानों में सुरक्षित रूप से रखवाने कहा गया है। उन्होंने गौठान प्रबंधन समिति को गौठानों में आने वाले पशुओं की संख्या के मान से पैरा की व्यवस्था करने को कहा है।