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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर राज्य के हित में केन्द्र से ज्यादा वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने, राजस्व घाटा अनुदान के मापदंडों में वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर सुधार करने, जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान को जून 2022 के बाद भी आगामी 5 वर्षाे के लिए और जारी रखने, कोल ब्लाक आबंटन के निरस्तीकरण से छत्तीसगढ़ को देय 4140 करोड़ रुपये प्रदेश को शीघ्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। उन्होंने केन्द्रीय वित्त मंत्री से छत्तीसगढ़ को धान से बॉयो एथेनॉल बनाने की अनुमति शीघ्र देने, केंद्र द्वारा पेट्रोल व डीजल पर सेस में कमी करने और केंद्रीय योजनाओं में केंद्र का अंश बढ़ाने की माँग की है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा है कि राज्य सरकारों के पास वित्तीय संसाधन सीमित है। कोविड के कारण विगत दो वर्षों में राज्य की आय में बड़ी कमी हुई है, जिससे राज्य को लोक कल्याणकारी योजनाओं के संचालन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य को चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति मद में लगभग 6,500 करोड़ की प्रतिपूर्ति प्राप्त होना अनुमानित है। आगामी वित्त वर्ष 2022-23 में यह राशि केवल प्रथम तिमाही (अप्रैल से जून) तक ही केन्द्र से प्राप्त होगी, जो कि लगभग 1,700 करोड़ होगी। इस प्रकार आगामी वर्ष में राज्य को लगभग 5,000 करोड़ के राजस्व की हानि की भरपाई की कोई व्यवस्था केन्द्र द्वारा नहीं की गई है। जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान को जून 2022 के बाद भी आगामी 5 वर्षों के लिये और जारी रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि सर्वाेच्च न्यायालय के वर्ष 2014 में पारित आदेश द्वारा देश भर में 215 कोयला खदानों के आवंटन को निरस्त किया गया था। आदेश में जिन कंपनियों को यह कोल ब्लॉक्स आवंटित थे, उन पर 295 रुपए प्रति टन की दर से पेनाल्टी अधिरोपित की गई थी, जो कि कंपनियों द्वारा केन्द्र सरकार के पास जमा की गई थी। यह राशि राज्यों को आवंटित किया जाना चाहिए, इससे छत्तीसगढ़ को भी 4,140 करोड़ रूपये प्राप्त होंगे। यह राशि राज्य को शीघ्र दी जाए।

बघेल ने पत्र में धान / चावल से बॉयो इथेनॉल बनाने की अनुमति के संबंध में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में धान का सरप्लस उत्पादन होने और धान के निराकरण में केंद्र सरकार का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण राज्य को हर साल बड़ी हानि उठानी पड़ती है। राज्य में 8 निजी निवेशकों के साथ 12 करोड़ लीटर प्रति वर्ष से अधिक ईथेनॉल उत्पादन के लिये एमओयू किया जा चुका है। इससे लगभग 5 लाख मीट्रिक टन अतिशेष धान की खपत हो सकेगी। केन्द्र सरकार की सहमति आवश्यक है। धान से इथेनॉल बनाने की अनुमति तत्काल दी जाए ताकि धान खराब होने से हो रही ’राष्ट्रीय क्षति’ और राज्य को हो रही बड़ी आर्थिक क्षति से बचाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि 2021-22 में भारतीय खाद्य निगम द्वारा छत्तीसगढ़ से 61.65 लाख मीट्रिक टन अरवा चावल लेने का निर्णय लिया गया है, जबकि पूर्व के वर्षों में राज्य से अधिकांशतः उसना चावल ही लिया जाता रहा है। राज्य में उत्पादित धान से अधिकतर उसना क्वालिटी का चावल बनता है। इससे अरवा चावल बनाने में बहुत कठिनाई होगी। प्रदेश में उसना के 418 पंजीकृत मिलर हैं, जिनकी मासिक मिलिंग क्षमता 5.95 लाख मीट्रिक टन है। एफसीआई द्वारा उसना चावल नहीं लिया गया तो मासिक मिलिंग क्षमता का पूर्ण उपयोग न होने से धान के निराकरण में विलंब होगा। इससे धान खराब होगा। यह प्रदेश के साथ ही अनाज की राष्ट्रीय क्षति होगी। उसना मिलों में काम करने वाले हज़ारों मजदूर बेरोजगार हो जायेंगे। देश के अन्य कई राज्यों से उसना चावल लिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को भी कम से कम 24 लाख मीट्रिक टन उसना चावल एफसीआई द्वारा लेने का लक्ष्य दिया जाए।

बघेल ने पत्र में लिखा है कि वर्तमान में 15 वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्यों को केन्द्रीय करों के संग्रहण में से 42 प्रतिशत हिस्सा दिया जा रहा है। उपरोक्त 42 प्रतिशत की राशि में से छत्तीसगढ़ राज्य का हिस्सा 3.408 प्रतिशत बनता है। पिछले 3 वर्षों में केन्द्रीय बजट में प्रावधानित केन्द्रीय करों की तुलना में राज्य को प्राप्त राशि निम्नानुसार है
वित्तीय वर्ष केन्द्रीय बजट में प्रावधान
इस प्रकार छतीसगढ़ को केन्द्रीय बजट में अंतरण हेतु प्रावधानित राशि के विरूद्ध 13,089 करोड़ रूपये कम प्राप्त हुए हैं। राज्य के हिस्से के 42 प्रतिशत राजस्व की तुलना में मात्र 34 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त हुआ है।
बघेल ने केन्द्र द्वारा पेट्रोल-डीजल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती के स्थान पर सेस में कमी करने का आग्रह करते हुए पत्र में लिखा है कि केन्द्र द्वारा 2 नवंबर 2021 से पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद कर में क्रमशः 5 रू. (15 प्रतिशत) और 10 रू. (31 प्रतिशत) प्रति लीटर की कटौती के बाद इन उत्पादों से मिलने वाले केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में औसतन 23 प्रतिशत की कमी होगी। उपरोक्त कटौती के कारण इन उत्पादों का नेट विक्रय मूल्य कम होने से राज्य द्वारा अधिरोपित वेट संग्रहण में प्रति वर्ष कुल 800 करोड़ रू. की कमी होने की संभावना है। इसलिए डीजल और पेट्रोल पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के स्थान पर केन्द्र द्वारा अधिरोपित सेस की राशि समाप्त / कम करना प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्रांश की राशि के संबंध में लिखा है कि- वर्ष 2014-15 में राज्य को केन्द्रीय योजनाओं के केन्द्रांश में 7,658 करोड़ प्राप्त हुए और इसके विरुद्ध राज्यांश 2,622 करोड़ था। केन्द्रांश व राज्यांश का औसत अनुपात 75ः15 था, जबकि 2021-22 में केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्रांश 9,794 करोड़ और राज्यांश 5,592 करोड़ है, जो कि केन्द्रांश व राज्यांश का औसत अनुपात 64ः36 होता है। इस प्रकार केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्रांश में 11 प्रतिशत की औसत कमी हुई है और यह भार राज्यांश के रूप में राज्य पर आर्थिक भार बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य को वैधानिक अधिकार होने के बाद भी विभिन्न कारणों से वित्तीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के गरीबों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं और समाज के अन्य वर्गों के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन संभव नहीं हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से अनुरोध करते हुए लिखा है कि राज्य के न्यायिक हितों के अनुरूप राज्य को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें।