- इंजेक्शन के लिए राज्य से बाहर जाने और पैसों के खर्च से मिला छुटकारा
द सीजी न्यूज
दुर्ग। हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए जिला चिकित्सालय दुर्ग में इन दिनों निःशुल्क इंजेक्शन लगाया जा रहा है। दुर्ग विधायक की पहल और सीएमएचओ के निर्देश पर इंजेक्शन खरीदे गए हैं। परिणाम स्वरूप हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों को अब महंगे इंजेक्शन लगाने से छुटकारा मिल गया है। इंजेक्शन लगाने के लिए उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर जाने की भी जरूरत नहीं पड़ रही है। पीड़ित लोगों को काफी राहत मिली है।

हीमोफीलिया ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें रक्त का थक्का ठीक से नहीं जमता है। हीमोफीलिया पीड़ित लोगों में कुछ निश्चित प्रोटीन की कमी होती है जिसे क्लॉटिंग कारक कहा जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जेपी मेश्राम ने बताया कि शरीर पर चोट लगने की स्थिति में खून का निकलना बंद ना हो रहा हो तो यह हीमोफलिया रोग का लक्षण हो सकता है। यह लक्षण दिखने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि हीमोफीलिया के दौरान होने वाला आंतरिक रक्तस्राव अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और जीवन को खतरे में डाल सकता है। हीमोफीलिया रोग होने का खतरा नवजात शिशुओं पर भी रहता है। यह गर्भवती महिला से शिशु में फैलता है। इस बीमारी के पीड़ित राहत की आस लेकर जिला अस्पताल आते हैं। कुछ पीड़ितों को शुरुआती राहत के लिए टेबलेट भी दिए जाते हैं। मरीजों की तकलीफ से राहत के लिए सीएमएचओ कार्यालय द्वारा इंजेक्शन खरीदे गए हैं, जो हीमोफीलिया के मरीजों को जिला अस्पताल में निःशुल्क लगाया जा रहा है।
महीने के भारी खर्च से मिली राहत
लाभार्थी दुर्ग निवासी अयाज अली (परिवर्तित नाम) ने बताया कि उन्हें साल 2015 से हीमोफिलिया के फेक्टर-9 का इंजेक्शन लग रहा है। इंजेक्शन की आवश्यकता रक्तश्राव की स्थिति पर निर्भर करती है। महीने में औसतन 4 इंजेक्शन लगते हैं और प्रत्येक इंजेक्शन की कीमत 13 से 15,000 रुपये होती है। यह इंजेक्शन हमेशा नागपुर और दिल्ली से लगवाते रहे हैं, लेकिन विधायक अरुण वोरा और सीएमएचओ डॉ मेश्राम की पहल पर पहली बार उन्होंने जिला अस्पताल दुर्ग में इंजेक्शन लगवाया है। पूरी तरह निःशुल्क इंजेक्शन। मुझे शारीरिक व मानसिक राहत के साथ ही आर्थिक रूप से भी बड़ी राहत मिली है।
राहत के अन्य उपाय
० नियमित व्यायाम।
० दांत और मुंह को स्वच्छ रखना।
० रक्त दान करते समय या रक्त स्थानांतरण के दौरान हीमोफीलिया रोग की जांचञ
० टीकाकरण सुनिश्चित कर लेना चाहिए।
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