द सीजी न्यूज
जांजगीर-चाम्पा। कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा के जिले में पदस्थ होने के बाद अब जिला मुख्यालय में मीटिंग का बहाना बनाकर ब्लाक स्तर के अधिकारियों को दफ्तर से गायब रहना आसान नहीं रह गया है। कलेक्टर की पहल से अधिकारियों को जिला मुख्यालय नहीं आना पड़ता। वीडियो कान्फ्रेसिंग से जुड़कर मीटिंग अटैण्ड करने की अनिवार्यता से अधिकारियों के आने-जाने में जलने वाले पेट्रोल-डीजल के लाखों रुपए भी बचने लगे हैं।
कलेक्टोरेट में होने वाली बैठकों में शामिल होने के लिए कई अफसरों लंबी दूरी तय करना पड़ता था। आने-जाने में पूरा दिन निकल जाता था। इस दौरान आम नागरिकों को दफ्तर में अधिकारी नहीं मिलते थे। ऑफिस पहुंचने पर उन्हें पता चलता था कि अधिकारी मीटिंग में गए हैं। जिला मुख्यालय में होने वाली मीटिंग के नाम पर अधिकारी समय पर दफ्तर में मौजूद नहीं रहते थे। आने-जाने में उनके द्वारा सरकारी वाहन प्रयोग करने से हर महीने लाखों रुपये का डीजल-पेट्रोल जलता था।
कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा ने जिले में पदभार ग्रहण करने के बाद जिला मुख्यालय में होने वाली समय-सीमा की बैठक सहित अन्य बैठकों में अधिकारियों को सभाकक्ष में प्रत्यक्ष बुलाने की बजाय वीडियो कान्फ्रेसिंग से जुड़कर बैठक अटैण्ड करने के निर्देश जारी कर दिए। कलेक्टर की इस छोटी सी पहल का असर यह हो रहा है कि समय-सीमा या अन्य बैठक के नाम पर कुछ अधिकारियों के कार्यालय से गायब रहने की प्रवृत्ति पर लगाम लगा है। डीजल-पेट्रोल का खर्च बचने से शासन के लाखों रुपए भी बचने लगे हैं।
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