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चुनाव आयोग पर अकबर का तीखा प्रहार : कहा – सार्वजानिक किये जाएं शिफ्टेड-एब्सेंट मतदाताओं के नाम

  • निर्वाचन आयोग खुद जवाब नहीं दे रहा, सरकार और भाजपा के प्रवक्ता जवाब दे रहे
  • देश में भारत निर्वाचन आयोग है – भारत सरकार निर्वाचन आयोग नहीं

THE CG NEWS

रायपुर। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने एक बार फिर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार को घेरा है। अकबर ने कहा कि जब भी देश में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और उसकी संवैधानिक भूमिका पर गंभीर सवाल उठते हैं, तो आयोग के बजाय सरकार और भाजपा के प्रवक्ता सामने आ जाते हैं?

अकबर ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और सरकार और भाजपा के प्रवक्ताओं द्वारा सरकार की यह वकालत सीधे तौर पर आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े करती है।

पूर्व मंत्री ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यही स्थिति आज छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रही है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। S.I.R प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम विलोपित कर मतदाताओं के अधिकार को लूटा गया है।

अकबर ने राज्य में हाल ही में संपन्न हुई एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल मतों का अंतर मात्र 6 लाख 32 हजार 382 (4.04%) वोटों का था। इसके विपरीत एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची से 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए—जो कि दोनों प्रमुख दलों के जीत-हार के अंतर से लगभग चार गुना है।

इनमें से 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं को केवल इसलिए ‘Shifted’ या ‘Absent’ श्रेणी में चिह्नित कर सूची से बाहर कर दिया गया क्योंकि वे रोजगार, कामकाज या शिक्षा के कारण अपने पते पर तात्कालिक रूप से उपलब्ध नहीं थे। बिना व्यक्तिगत नोटिस दिए या बिना किसी ठोस कानूनी प्रक्रिया का पालन किए केवल एक दिन घर पर अनुपस्थित रहने के आधार पर नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करना गंभीर चिंता का विषय है।

मोहम्मद अकबर ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची का पुनरीक्षण वास्तविक त्रुटियों को सुधारने के लिए होना चाहिए, न कि किसी पात्र नागरिक को उसके मौलिक और संवैधानिक अधिकार से बेदखल करने का षड्यंत्र बनना चाहिए। निर्वाचन आयोग को इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए ताकि छत्तीसगढ़ और देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।

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