
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
राजनीतिक और प्रशासनिक नजरिये से सख्त और कड़क माने जाने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आम जनता के लिए बेहद संवेदनशील हैं। विशेषकर गरीबों, जरूरतमंद लोगों के लिये मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता के अनगिनत आयाम गढ़े हैं। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता का ऐसा ही एक उदाहरण इन दिनों सुर्खियों में है। इसके लिये बनाया गया पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्टर के नीचे लिखा है … एक ही तो दिल है दाऊजी … कितनी बार जीतोगे …
दरअसल सुबह एक अखबार में बमुश्किल 8-10 लाइन की एक खबर छपी जिसमें एक रिक्शा चालक की जिंदगी की बेबसी की कहानी बयां की गई है। रिक्शा चालक गणेश साहू की पत्नी चल बसी है। दो बच्चों गंगा और अरुण को पालने और उन्हें शिक्षा देने के लिये बस एक रिक्शा ही बचा है। क्योंकि उनका मकान टूट चुका है। लिहाजा इसी रिक्शे को चलाकर गणेश अपना जीवनयापन भी करते हैं और इसी रिक्शे को अपना घर भी बना लिया है।
इतनी तकलीफ झेलने के बाद भी गणेश साहू अपने बच्चों को पढ़ाना नहीं भूलते। सुबह अखबार में छपी इस खबर को पढ़ने के बाद दाऊजी यानी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर के कलेक्टर को निर्देश दिये। अफसरों को बच्चों का एडमिशन कराने कहा गया। शाम तक बच्चों का एडमिशन स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में हो गया। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता से आवासहीन रिक्शाचालक को आवास भी मिल गया। मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल से गंगा और अरुण के साथ उनके पिता गणेश साहू को जीवन में काफी हद तक सुकून मिला है। बच्चों का भविष्य सुरक्षित होने के साथ ही परिवार को छत भी मिल गई है।
धन्यवाद दाऊ जी… गरीबों के प्रति आपकी संवेदनशीलता को सलाम ….
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