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आज शुक्रवार को शब ए बारात मनाया जा रहा है। इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों में इबादत करते हैं। मुसलमानों के लिए यह रात बेहद पवित्र रात मानी जाती है। कब्रिस्तान जाकर मरहूमों (मृत लोगों) की मगफिरत के लिए दुआ मांगते है। लोग नमाज पढ़ने के साथ अल्लाह से अपने पिछले साल हुए गुनाहों की माफी मांगते हैं। दुआ मांगी जाती है। आज की रात मस्जिदों और कब्रिस्तान को विशेष रूप से सजाया गया है।
शब ए बारात की रात के मौके पर दुनिया से विदा हो चुके लोगों की कब्रों पर जाकर उनके हक में मगफिरत की दुआ की जाती है। माना जाता है कि अगर इंसान शब ए बारात की रात सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करते हुए अपने गुनाहों से तौबा करे तो अल्लाह उसके हर गुनाह को माफ कर देता है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ये पर्व शाबान महीने में 14 तारीख को सूर्यास्त के बाद शुरू होकर 15 वीं तारीख की शाम तक मनाई जाती है। इस दिन गरीबों में इमदाद (दान) करने की परंपरा है।
शब और बारात से मिलकर बना है, जहाँ शब का अर्थ रात होता है, वहीं बारात का मतलब बरी होना है। इस दिन पूरी दुनिया के सारे मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। वे दुआएं मांगते हैं और अपने गुनाहों की तौबा करते हैं। मस्जिदों में और कब्रिस्तानों में इबादत के लिये जाते हैं। घरों पर भी रौशनी की जाती है। लोग पूरी रात अल्लाह की इबादत करते हुए बिताते हैं।
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