शर्मनाक : दिव्यांग बच्चे की पेंशन के लिए मां को कई साल तक निगम के चक्कर काटना पड़ा : वर्षों बाद समाधान शिविर में मिला न्याय
17/05/2022
शिविर में कमिश्नर ने 3 घंटे में किया समस्या का समाधान
बच्चे को निगम की गाड़ी से छोड़ा गया घर, पेंशन कार्ड भी घर पहुंचाकर दिया
बड़ा सवाल – दिव्यांग बच्चे को पेंशन के लिए इतने साल तक चक्कर क्यों काटना पड़ा
द सीजी न्यूज
बड़ा सवाल – दिव्यांग बच्चे की पेंशन के लिए महीनों तक नगर निगम के चक्कर काटने की जरूरत क्यों पड़ती है साहब ?
दुर्ग / सरकारी सिस्टम कितना लापरवाह, कितना बेदर्द और क्रूर हो सकता है, इसकी मिसाल आज जनसमस्या समाधान शिविर में देखने मिली। सिकोलाभाठा स्थित स्कूल में वार्ड 14, 15 और 16 के नागरिकों से मांगों और शिकायतों के आवेदन लिये जा रहे थे। इसी दौरान एक महिला अपने दिव्यांग बच्चे की दिव्यांगता पेंशन पाने के लिए शिविर में पहुंची। महिला ने बताया कि पेंशन के लिए कई साल से नगर निगम के चक्कर काट रही है।
नगर निगम के वाहन से घर पहुंचाने की व्यवस्था होने पर बच्चे को दुलारती मां
इसकी जानकारी मिलने पर निगम आयुक्त हरेश मंडावी ने सम्बंधित विभाग को प्रकरण का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए। फटकार पड़ने के बाद दिव्यांग बच्चे के पेंशन प्रकरण का तीन घंटे के भीतर निराकरण किया गया। आयुक्त के निर्देश पर बच्चे को शिविर स्थल से उसके घर तक निगम के वाहन से पहुंचाने की व्यवस्था की गई। पेंशन कार्ड भी उसके घर पहुंचाया गया।
शिविर में निगम कमिश्नर ने जिस तत्परता से बच्चे का पेंशन कार्ड बनवाया, उसके लिए कमिश्नर की सराहना की जानी चाहिये, लेकिन कमिश्नर जिस सिस्टम के मुखिया हैं, उस सिस्टम ने कई साल तक बच्चे को उसका हक नहीं दिया। बच्चे की मां को शारीरिक और मानसिक रूप से कष्ट का सामना करना पड़ा। बड़ा सवाल ये है कि वर्षों तक बच्चे को पेंशन नहीं मिली, उसकी भरपाई कौन करेगा ?
दिव्यांग बच्चों की मदद करना समाज के हर तबके की जिम्मेदारी है। समाज के तमाम वर्ग इस जिम्मेदारी का निर्वहन भी करते हैं। दूसरी ओर, नगर निगम या सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उन्हीं दिव्यांग बच्चों के लिए इतने लापरवाह और निरंकुश हो जाते हैं कि बच्चों को उनका हक तक नहीं मिलता। इतने साल तक दिव्यांग बच्चे और उसकी माता के साथ हुए अन्याय के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या उसे सजा मिलेगी ? क्या ऐसा सिस्टम बनेगा कि भविष्य में किसी और मासूम के साथ ऐसा सलूक न हो।
बहरहाल,
शुक्रिया कमिश्नर साहब …
वर्षों से अन्याय के अंधेरे में भटकते दिव्यांग बच्चे और उसकी माता को न्याय की रोशनी देने के लिए शुक्रिया …