द सीजी न्यूज
जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल में गिरे 11 वर्षीय राहुल साहू को बचाने की मुहिम अभी तक थमी नहीं है। मंगलवार को सुबह 8 बजे तक यह आपरेशन लगातार जारी है। राहुल को बोरवेल में फंसे हुए आज चौथा दिन है। चार दिनों से लाखों लोग राहुल को सुरक्षित निकालने के अभियान की सफलता की कामना कर रहे हैं। कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि राहुल शाम से अब बेहतर हालत में है। खाना मांग रहा है। इसके बाद हम फिर से आशान्वित हुए हैं। उसकी सांसें भी ठीक चल रही हैं। बच्चे की जान को खतरा नहीं है। अब हम कह सकते हैं कि ऑपरेशन के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुके हैं।
बोरवेल के गड्ढे में 65 फीट नीचे फंसे राहुल तक पहुंचने के लिए समानांतर गड्ढा खोदने के बाद सुरंग बनाने का कार्य रविवार की शाम से शुरू हुआ था। जिला प्रशासन के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और एसईसीएल के अधिकारी-कर्मचारी अभियान में दिन-रात लगातार जुटे रहे। सोमवार को रात 11 बजे से टनल का काम पूरा होने पर इसके भीतर से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।
मलबा हटाने के बाद लगा कि सोमवार को रात साढ़े 12 बजे तक राहुल को निकाल लिया जाएगा, लेकिन पत्थर टूटने से बोरवेल में फंसे राहुल को नुकसान होने की आशंका के चलते यह ऑपरेशन धीरे धीरे चलाया गया। पूरी सावधानी बरतते हुए पत्थरों को तोड़ने की गति एकदम धीमी कर दी गई, ताकि राहुल को किसी तरह का नुकसान न हो। पूरी रात यह आपरेशन जारी रहा। मंगलवार को सुबह 8 बजे तक यह ऑपरेशन थमा नहीं है। आपरेशन कितनी देर और चलेगा। कहा नहीं जा सकता।
यह अब तक का देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू आपरेशन है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस आपरेशन की लगातार अपडेट ले रहे हैं और कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं।
ऐसे चला ऑपरेशन
राहुल को बोरवेल से निकालने के लिए 60 फीट गड्ढा खोदा गया। इसके बाद राहुल तक पहुंचने के लिए 3 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई। इस दौरान रोबोट के माध्यम से राहुल को निकालने की कोशिश की गई लेकिन यह कोशिश कामयाब नहीं हुई। रविवार को दोपहर के समय यह संभावना जताई गई थी कि देर रात तक राहुल को बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन टनल के रास्ते में चट्टान आने के कारण इस रेस्क्यू अभियान में काफी देर लगी।
शुक्रवार को दोपहर के समय बोरवेल में गिरा था राहुल, दिन-रात चला रेस्क्यू मिशन
शुक्रवार को दोपहर बाद मालखरौदा ब्लाक के ग्राम पिहरीद में घर के पीछे खोदे गए बोरवेल में राहुल साहू गिर गया था। करीब 65 फीट नीचे बोरवेल में राहुल फंस गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार इस अभियान पर नजर बनाए रहे। उन्होंने लगातार कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला के अलावा राहुल के परिजनों से भी बातचीत की। राहुल साहू को बचाने के लिए शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी। कलेक्टर, एसपी से लेकर अन्य अफसर पिहरीद में चौथे दिन भी जमे रहे। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ सहित सेना के जवान दिन-रात मेहनत कर राहुल को सही सलामत बाहर निकालने कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
अभियान के तहत बोरवेल से कुछ दूरी पर खोदाई का काम किया गया। रविवार की शाम तक 63 फीट गहरा गड्ढा खोदा जा चुका था। इसके बाद राहुल तक पहुंचने के लिए टनल बनाने के दौरान बीच में चट्टान आने के कारण काम में काफी रुकावट आई। सुरंग बनाने के लिए खदान में रेस्क्यू करने वाली कुसमुंडा और मनेन्द्रगढ़ के एसईसीएल के अधिकारियों को बुलाया गया। कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला इन अधिकारियों से लगातार चर्चा करते रहे।
स्वास्थ्य विभाग की टीम अलर्ट रही
जिला प्रशासन द्वारा आपात चिकित्सा व्यवस्था की गई। सीएमएचओ सहित डॉक्टर की टीम मौके पर मौजूद रहे। घटनास्थल पर ऑक्सीजन के पर्याप्त सिलेंडर रखे गए हैं। जिंदल रायगढ़ व अपोलो अस्पताल को अलर्ट किया गया। राहुल की स्थिति सामान्य रहने पर जिला अस्पताल में भर्ती करने और स्वास्थ्य ठीक न होने की स्थिति में 60 किलोमीटर दूर जिंदल अस्पताल में भर्ती करने की तैयारियां पहले से कर ली गई हैं।
पहली बार में इसलिए फेल हो गया रोबेट
गुजरात से आए जिस रोबेट पर प्रशासन को पूरा विश्वास था, वह रोबेट रेस्क्यू अभियान में पहली कोशिश में फेल हो गया। रोबेट एक्सपर्ट की टीम लगातार प्रयासों में जुटी रही। प्रशासन की टीम टनल व रोबेट दोनों दिशा में काम कर रही है। रोबेट एक्सपर्ट गुजरात के महेश अहीर ने बताया कि पहली बार जब रोबेट को डाला तब राहुल ने कोई रिस्पांस नहीं दिया। जहां राहुल बैठा है, वहां पर पत्थर भी है। इसलिए रोबेट पूरी तरह से राहुल को पकड़ नहीं पाया। अगर राहुल उठ जाता तो रोबोट उसे पकड़ लेता। राहुल को उठाने का प्रयास किया गया।
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