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लाखों इन्वेस्टर्स का पैसा डूब गया, एलआईसी और एसबीआई के सामने संकट की स्थिति : पूरा देश अडानी को लेकर सवाल कर रहा : जवाब देने की बजाय नेहरू के सरनेम की बातें कर रहे मोदी : राजेंद्र साहू

  • अपने प्रिय मित्र अडानी को बचाने के लिए संसद में अतार्किक और बेसिरपैर की बातें कहना गलत
  • संसद में शेरो-शायरी और किस्से-कहानियां सुनाने की बजाय देशवासियों को अडानी मामले में जवाब दें  

द सीजी न्यूज

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने कहा है कि अडानी से जुड़े मामले का खुलासा होने के बाद से लाखों इन्वेस्टर्स को भारी घाटा उठाना पड़ा है। एलआईसी, स्टेट बैंक आफ इंडिया जैसी संस्थाओं को अरबों रुपए का नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। देश के 140 करोड़ देशवासियों का यह दुर्भाग्य है कि जब पूरा देश अडानी मामले में पीएम मोदी से जवाब मांग रहा है तो वे पंडित नेहरू के सरनेम का मुद्दा उठा रहे हैं।

राजेंद्र ने कहा कि पीएम मोदी ने संसद में विपक्ष को जवाब देते हुए जो बयान दिया है, देश की राजनीति में भाजपा राज में आई गिरावट का एक बड़ा नमूना है। देश और देशवासियों के आर्थिक हितों के प्रति मोदी कितने गंभीर हैं, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहुचर्चित अडानी मामले का जवाब देने से बचते हुए मोदी संसद में शेरो-शायरी और किस्से-कहानियों से भरी बयानबाजी करते रहे।

राजेंद्र ने जोर देकर कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू महान नेता थे, हैं और हमेशा रहेंगे। आजादी के पहले पंडित नेहरू ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कई बार जेल गए। आजादी के बाद राष्ट्र का आर्थिक ढांचा मजबूत बनाने सार्वजनिक उद्योग प्रारंभ किये। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े बांध बनवाए। पंडित नेहरू ने देश में जिन बेशकीमती संपत्तियों को खड़ा करने में योगदान दिया।  इससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और करोड़ों लोगों को रोजगार मिला। खाद्यान्न उत्पादन भी बढ़ता गया।

राजेंद्र ने तल्ख लहजे में कहा कि पंडित नेहरू ने जेल जाने से बचने के लिए सावरकर की तरह न तो माफीनामा लिखा, न अंग्रेजों से पेंशन ली। पंडित नेहरू ने मोदी की तरह देश की संपत्ति भी नहीं बेची। बल्कि उन्होंने स्वयं की संपत्ति आनंद भवन सहित कीमती जमीन देश को दान कर दी।

राजेंद्र ने कहा कि यह शर्मनाक है कि देश की बेशकीमती संपत्तियों को मोदी एक-एक कर बेचते जा रहे हैं। पंडित नेहरू ने देश के निर्माण में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि अडानी के बारे में सवाल करने पर मोदी अपने प्रिय मित्र को बचाने के लिए नेहरू को लेकर अतार्किक और बेसिरपैर की बातें कर रहे हैं। देश की जनता इस विडंबना से उपजे हालात को अच्छी तरह समझ रही है। बेहतर होगा कि पीएम मोदी इधर उधर की बातें न करें, वे अडानी को लेकर 140 करोड़ देशवासियों के सवालों का जवाब दें।

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