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आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश न देने 13 स्कूलों के प्रबंधन ने शिक्षा विभाग को दी गलत जानकारी : दुर्ग-भिलाई पालक संघ ने जनदर्शन में कलेक्टर से की शिकायत : स्कूलों के खिलाफ अपराध दर्ज करने की मांग की

द सीजी न्यूज

दुर्ग-भिलाई पालक संघ ने आज कलेक्टर जनदर्शन में स्कूल प्रबंधन द्वारा गलत जानकारी व दस्तावेजों के आधार पर आरटीई (शिक्षा के अधिकार) के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश न देने के मामले में 13 स्कूलों के खिलाफ शिकायत की। इन स्कलों के खिलाफ अपराध दर्ज करने और आरटीई के तहत गरीब बच्चों को आरक्षण के तहत प्रवेश दिलाने की मांग की गई । जिलाधीश पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने आरटीई एक्ट की समीक्षा व जांच करने के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

दुर्ग-भिलाई पालक संघ अध्यक्ष नासिर खोखर और महासचिव अनिल जायसवाल (अधिवक्ता) के नेतृत्व में दिये गए ज्ञापन में कहा गया है कि 4 साल पूर्व तक जिले के सभी निजी शिक्षण संस्थाओं में आरटीई शिक्षा के अधिकार के तहत 25% बीपीएल परिवार की छात्रों का प्रवेश होता रहा। पिछले 4 सालों में कुछ शिक्षण संस्थाओं ने जिसमें 13 स्कूल विश्वदीप उ मा दुर्ग, सेंट जेवियर बोरसी, सेंट जेवियर्स शांति नगर, मार बेसेलियोस भिलाई, सेंट थॉमस रूआबांधा, ज्योति विद्यालय चरोदा इंग्लिश, ज्योति विद्यालय हिंदी चरोदा, विद्या ज्योति इंग्लिश कुम्हारी और बैथनी विद्यालय बोरसी, निर्मला रानी खुर्सीपार,भिलाई पब्लिक स्कूल, विचक्षण विद्यापीठ, गांधी मेमोरियल नंदिनी नगर स्कूल के प्रबंधन ने खुद को अल्पसंख्यक स्कूल बताकर गलत जानकारी दी और गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर शिक्षण संस्थाओं को आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश देने से मुक्त कर लिया।

इन स्कूलों के प्रबंधन ने अल्पसंख्यक आयोग से अल्पसंख्यक संस्था होने का प्रमाण प्राप्त कर संस्था को आरटीई से मुक्त कर लिया। जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा अधिनियम के विपरीत इन स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश बंद करने का निर्णय भी समझ से परे है। इन शिक्षण संस्थाओं को संचालित करने वाली संस्थाएं अल्पसंख्यक है, लेकिन यहां अध्यनरत बच्चे बहुसंख्यक व सभी समुदाय के लोग हैं।

शिक्षा के अधिकार के तहत आरटीई में अल्पसंख्यक स्कूल जिन स्कूलों में 75% एक ही समाज या विशेष समुदाय के बच्चे पढ़ते हो और उन्हें कोई विशेष भाषा की शिक्षा दी जाती हो ( जैसे मदरसा और वैदिक शिक्षा ), उन स्कूलों शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत मुक्त किया गया है। गलत प्रमाण और गलत जानकारी देकर स्कूलों द्वारा आरटीई से मुक्त कर लिया गया। पिछले 4 सालों से इन संस्थाओं में गरीब बच्चे आरटीई के तहत प्रवेश से वंचित हो गए, जो कि अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

नासिर खोखर ने गरीब वंचित छात्रों की ओर से मांग करते हुए कहा कि इन शिक्षण संस्थाओं पर अपराध दर्ज किया जाए और इनके खिलाफ  कड़ी कार्रवाई की जाए। इन स्कूलों में इसी सत्र से आरटीई के तहत गरीब छात्रों को 25% आरक्षण के तहत प्रवेश दिलाने की मांग की गई।ज्ञापन के साथ उन स्कूलों  द्वारा प्रस्तुत गलत दस्तावेज की कॉपी भी सौंपी गई। ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से नासिर खोखर, अनिल जायसवाल, विवेक मिश्रा, रविशंकर सिंह, ज्योति शर्मा, मो इलियास, कमलेश सिंह, मो अकील व अन्य पालक उपस्थित रहे ।

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