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पोटिया रोड की तरह क्या इस सड़क पर भी दुर्घटना से मौत का इंतजार … इतने बेपरवाह क्यों हैं जिम्मेदार ???

द सीजी न्यूज 

स्टेशन रोड की हालत इतनी बदतर होने के बाद भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। शहर के चौमुखी विकास का दावा करने वाले विधायक अरुण वोरा से लेकर पीडब्लूडी के तमाम अफसर कह रहे हैं कि बारिश के बाद बनेगी सड़क। सवाल ये है कि बारिश के पहले क्यों नहीं बनी सड़क। पिछले तीन साल से स्टेशन रोड की हालत बद से बदतर होती रही, लेकिन जिम्मेदारों ने न सड़क की सुध ली, न शहर में रहने वाले नागरिकों की।

दुर्ग रेलवे स्टेशन से इंदिरा मार्केट की ओर जाने वाली स्टेशन रोड पर बेशुमार गड्‌ढे हैं। पिछले पांच साल से इस सड़क पर सिर्फ पैचवर्क का काम हुआ। कुछ ही दिनों में पैचवर्क की परतें उधड़ गई। भ्रष्टाचार की परतें भी उधड़ गई। इसी बदहाल सड़क पर लोग आवाजाही करते रहे। गड्‌ढे भरी सड़क पर आवाजाही से लोगों के गर्दन से लेकर कमर तक बैकबोन की बैंड बज चुकी है। टूटी सड़कों और बेशुमार गड्‌ढे के कारण एक्यूट डिस हर्निएशन यानी सर्वाइकल एंड लंबर की बीमारी के मरीज बढ़ा दिए हैं। रीढ़ की हड्‌डी में गैप बढ़ने लगे हैं। 

भले-चंगे लोग इस सड़क पर आवाजाही करते हुए कई तरह के बोन डिसीज का शिकार हो रहे हैं। साल दर साल आम जनता इस सड़क पर आवाजाही के दौरान परेशानहाल हो रही है। शहर के जिम्मेदार सो रहे हैं।

पोटिया चौक पर कुछ अरसा पहले सड़क पर ऐसे ही गड्‌ढे के कारण दुपहिया से गिरने के कारण एक बच्ची की मौत हो गई। बाद में दो अन्य भीषण दुर्धटनाएं भी हुई जिसके कारण मौतें हुई। इसके बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुली। रोड की मुकम्मल मरम्मत का काम शुरू किया गया।

सवाल ये है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अफसरों को क्या स्टेशन रोड पर भी मौत का इंतजार है ?

रोज विकास के दावे करने वाले विधायक अरुण वोरा से लेकर शहर में कभी कभी नजर आने वाले सांसद विजय बघेल और राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय जैसे जिम्मेदार क्या सिर्फ सत्ता सुख के लिए जनप्रतिनिधि होने का तमगा लगाए बैठे हैं ??

सवाल ये भी है कि रोड की बदहाली के लिए पीडब्लूडी अफसरों की कोई जिम्मेदारी बनती है या वेतन और वेतन से कई गुना ज्यादा भारी-भरकम कमीशन खाना ही एकमात्र काम रह गया है ???

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