- पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता हो जाती है नष्ट
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
राजनांदगांव / आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा फसल अपशिष्ट को जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तहत खेती में कृषि अवशेषों को जलाये जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। पराली जलाने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक दंड के रूप में 2 एकड़ से कम खेत पर 2500 रुपए, 2 से 5 एकड़ खेत पर 5 हजार रुपए और 5 एकड़ से अधिक पर 15 हजार रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।
जिला प्रशासन ने अपील करते हुए कहा कि जिले में सुराजी गांव योजना के तहत गौठान निर्मित किये गये है, उसमें धान की पराली का दान करना चाहिए। ताकि, गौठान में वर्ष भर पशुओं के लिए चारा आपूर्ति बनी रहें। पैरादान करने के लिए संबंधित गौठान समिति व ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर सकते हैं।
किसानों को भ्रम है …
किसानों को भ्रम है कि पराली जलाने के बाद अवशेष (राख) से खेत को खाद मिलेगा। जबकि यह गलत है। वास्तविकता ये है कि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता और लाभदायक कीट खत्म हो जाते हैं। इससे वायु प्रदूषण भी होता है। इसके कारण मनुष्य, पशु, पक्षी को कई तरह की बीमारियां भी होती है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे शहरों में कुछ वर्षों से इसके दुष्प्रभाव देखने मिल रहे हैं।
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