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रायपुर में धर्म संसद के संरक्षक दूधाधारी मठ के महंत संत रामसुन्दर दास ने खुद को धर्मसंसद से अलग करने का फैसला सुनाते हुए सभा छोड़ दी। महंत राम सुंदर दास ने कहा कि इस मंच से एक दिन पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गाली दी गई। इसकी कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने खुद को धर्मसंसद से अलग करने का फैसला कर लिया। महंत रामसुंदर दास जो इस कार्यक्रम के संरक्षक थे, लेकिन धर्मसंसद में हुए विवादास्पद घटनाक्रम के बाद उन्होंने प्रतिरोध करने का साहस दिखाया।
रायपुर में आयोजित धर्म संसद में स्वयंभू संत कालीचरण ने काफी जहरीले अंदाज में बयान दिये थे। उनके बयान के विरोध में रायपुर नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे की तहरीर पर रायपुर पुलिस ने कालीचरण बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। युवा कांग्रेस ने धर्म संसद के आयोजकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध हरितवाल ने कहा कि रायपुर में आयोजित इस धर्म संसद के आयोजनकर्ताओं पर भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए, जिन्होंने कालीचरण जैसे बाबा को आमंत्रित किया। कालीचरण की भाषा में हिंसा झलक रही है जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ है और अस्वीकार्य है। महात्मा गांधी के देश में ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आयोजन समिति के लोगों को यह सुनिश्चित करना था कि सभा में हिन्दू सनातन धर्म की बात हो, देवी देवताओं की बात हो, समाज को मजबूत करते हुए देश को मजबूत करने की बात हो। कालीचरण बाबा जैसे लोगों को आमंत्रित कर छत्तीसगढ़ का शांत वातावरण खराब करने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि कालीचरण बाबा के बयान का मंच से ही विरोध जताने वाले राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष और दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास आयोजन के संरक्षक थे। कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय और रायपुर नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे भी आयोजन से जुड़े हुए थे। हालांकि, आमंत्रण में आयोजक के रूप में एक संगठन श्री नीलकंठ सेवा संस्थान एवं समस्त हिंदू संगठनों के नाम का उपयोग हुआ था। संरक्षकों में शंकराचार्य आश्रम के इंदुभवानंद और शदाणी दरबार के प्रमुख युधिष्ठिर लाल भी शामिल किये गए थे। जिस समय महात्मा गांधी को गाली देकर उनके हत्यारे का महिमामंडन हो रहा था, उसमें से अधिकांश लोग वहां मौजूद भी थे।
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