
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
गणतंत्र दिवस के मौके पर जिन बच्चों को स्कूल या मोहल्ले में होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के मौके पर मौजूद रहना है, उनमें से कई बच्चों के लिए फुटपाथ या चौक चौराहों पर तिरंगा झंडा बेचना मजबूरी है। इन बच्चों के आर्थिक हालात इस कदर बिगड़े हैं कि स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस सहित हर तीज त्योहार के मौके चार पैसे कमाने के अवसर देते हैं।
आज गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले देश को आजादी दिलाने वाले बापू की प्रतिमा के सामने तीन बच्चे कागज के तिरंगे झंडे बेच रहे थे। दिन भर सड़क पर धूल खाते, बेशुमार वाहनों की भागमभाग से बचते हुए ज्यादा से ज्यादा झंडे बेचने के लिए ये बच्चे हर आने जाने वाले शख्स से झंडा खरीदने की गुहार लगा रहे थे। अगर कोई एक झंडा खरीदने आता तो एक और खरीदने की प्रार्थना करते। दिन भर की मेहनत के बाद महज दस-बीस रुपए का नोट मिलने की खुशी क्या होती है? यह सवाल कोई इन बच्चों से पूछे …
इसी व्यस्ततम सड़क से महापौर धीरज बाकलीवाल, एमआईसी मेंबर हमीद खोखर और ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष अजय मिश्रा गुजर रहे थे। महापौर ने जब तिरंगा झंडा बेचते इन बच्चों को देखा तो कार रुकवाई। इन बच्चों के करीब पहुंचे और सभी बच्चों के सारे तिरंगे झंडे खरीद लिए।
यकीन मानिये … बचपन मुस्कुरा उठा …
काश … हर शहर और गांव में ऐसे सभी बच्चों के चेहरे पर ऐसी मुस्कुराहट आ जाए तो कितना अच्छा होगा … है ना …
आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं …
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