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भिलाई के हर्षित का स्टार्टअप : ई-क्लिनिक के माध्यम से वीडियो कॉलिंग कर विशेषज्ञ डाक्टरों से कम फीस में मिलेगी मेडिकल सलाह

द सीजी न्यूज

दुर्ग / सोनी इंटरटेनमेंट टेलीविजन चैनल पर स्टार्टअप से जुड़ा एक रियलिटी शो आ रहा है – शार्क टैंक। इसमें प्रतिभागी अपने स्टार्टअप से जुड़े विचार रखते हैं। विशेषज्ञ उद्यमियों को ये विचार पसंद आते हैं तो वे इनमें निवेश करने का निर्णय लेते हैं। भिलाई के युवा उद्यमी हर्षित ताम्रकार ने मेडिशटर ई-क्लिनिक का विचार रखा और शार्क टैंक के सीजन 2 के लिए एप्लाई किया। उन्हें क्वालिफाई किया गया, लेकिन फाइनल राउंड में वे अपनी जगह नहीं बना पाये। क्योंकि अभी उन्होंने इसकी शुरूआत ही की थी। हालांकि उनका विचार चयनकर्ताओं को काफी अच्छा लगा। उन्होंने हर्षित से कहा कि अगले सीजन में जब वे अपने स्टार्टअप का विस्तार कर पाएं तो जरूर हिस्सा लें।

अक्सर देखा गया है कि लोग मेडिकल स्टोर में ही फार्मासिस्ट से दवा देने का आग्रह करते हैं। बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाईयां देने की मनाही के कारण लोगों को कई बार दवा नहीं मिल पाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में एमबीबीएस और एमडी डाक्टर कम होने के कारण यह समस्या ज्यादा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए हर्षित ने ई-क्लिनिक का कांसेप्ट रखा है।

सेक्टर 6 में जिस मेडिकल स्टोर से उन्होंने इसकी शुरूआत की, वहां पर उन्होंने स्कैनर रखा है। स्कैनर में स्कैन करते ही विशेषज्ञ डाक्टरों की कैटेगरी मरीज के सामने आ जाएगी। मान लीजिए कि ईएनटी से संबंधित कुछ समस्या है, तो वे ईएनटी डाक्टर को क्लिक करेंगे और वीडियो कॉल से डाक्टर सलाह और दवाएं देंगे।

हर्षित ने बताया कि डाक्टर की दवा की पर्ची मरीज के मोबाइल पर आ जाएगी। फालोअप के लिए भी डाक्टर उपलब्ध रहेंगे। यह ई-क्लिनिक ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी, जहां से सीएचसी और पीएचसी की दूरी अधिक है। हर्षित की योजना प्रदेश भर में 500 ई-क्लिनिक शुरू करने की है। उनके इस स्टार्टअप में तकनीकी कार्य के लिए सात सहयोगी भी हैं। उनके ई-क्लिनिक से 15 विशेषज्ञ डाक्टर जुड़े हैं। कंसल्टिंग फीस 200 रुपए से 300 रुपए तक है।

हर्षित ने बताया कि फीस रीजनेबल रखी गई है और फालोअप में यह कम होती जाएगी। कोरोना काल में भी लोगों के घर तक दवा पहुंचाने के लिए हर्षित ने एक मेडिशटर एप बनाया था, जिसके माध्यम से घर तक दवा मंगाई जा सकती थी। इसमें ऐसी दवाएं भी थीं, जिनकी उपलब्धता दूसरे राज्यों में ही थी।

इनक्यूबेशन ट्रेनिंग भी मिली और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से मदद भी – हर्षित ने बताया कि राज्य सरकार ने उनके स्टार्टअप को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। इनक्यूबेशन की ट्रेनिंग के दौरान उन्हें अपने विचारों को बेहतर रूप से प्रस्तुत करने और उसे अमलीजामा पहनाने में मदद मिली। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना से भी उन्हें मदद मिली।

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