द सीजी न्यूज
राजनांदगांव। छुरिया विकासखंड के टिपानगढ़ में महिला की संदिग्ध मौत के संबंध में प्रशासन की टीम ने जांच पूरी कर ली है। ग्राम टिपानगढ़ पहुंचकर जिला प्रशासन की टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। अधिकारियों ने बताया कि भागीरथी साहू के घर पर मिले चावल और धान की बोरियों से यह स्पष्ट है कि घर पर खाद्यान्न की कोई कमी नहीं थी। भागीरथी साहू की पत्नी सुखबती बाई साहू की मृत्यु के बारे में स्वयं भागीरथी साहू ने बताया कि खाद्यान्न की कमी से नहीं, बल्कि उल्टी-दस्त होने और समय पर इलाज न होने से संभावित है। पुलिस द्वारा इस मामले में मर्ग कायम कर पृथक से जांच पड़ताल की जा रही है।
भागीरथी साहू और उसके परिवार स्वयं की बीमारी व अन्य कारणों से अपने घर पर ही बीते डेढ़ वर्षों से एकांत जीवन यापन कर रहे थे। ग्राम वासियों से काफी कम मेलजोल रखते थे। अत्यंत आवश्यक स्थिति में ही संबंधित ग्रामवासी और पीडीएस सेल्समेन, किराना दुकानदार, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से सीमित लोक व्यवहार रखते थे। भागीरथी साहू की मानसिक अवस्था सामान्य न होने के कारण उनका पूरा परिवार ग्रामवासियों से अलग अपने घर पर रहकर जीवन यापन करते थे। जनप्रतिनिधियों व अन्य ग्रामवासियों ने भी सामाजिक बहिष्कार जैसी घटना से इंकार किया है।
अप्रैल 2023 में भागीरथी साहू के बड़े पुत्र लोकेश साहू की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद से परिवार द्वारा स्वयं को घर में एक तरह से नजरबंद कर लिया गया। डायल 112 को बुलाने के बाद काफी प्रयासों से दरवाजा खुलवाया गया था। इसके बाद लोकेश साहू के शव का दाह संस्कार ग्रामवासियों के सहयोग से उसके छोटे पुत्र चेतन साहू द्वारा किया गया। ग्रामवासी भागीरथी साहू के परिवार से मेलजोल रखते थे और विपत्ति के समय यथासंभव सहयोग भी करते थे। कुछ मामलों में ग्रामवासियों के मध्य आपसी मनमुटाव के बावजूद भी ग्राम टिपानगढ़ में सामाजिक बहिष्कार की स्थिति नहीं थी।
ग्राम पंचायत में प्रतिमाह हितग्राहियों और मृतक महिला के परिवार द्वारा खाद्यान्न सामग्रियों का उठाव किया जा रहा था। भागीरथी साहू के परिवार के राशन को ग्रामवासियों द्वारा नहीं रोका गया। माह मार्च और अप्रैल 2023 के राशन हेतु उनके परिवार को सूचना दी गई, परन्तु उनके परिवार से राशन लेने हेतु कोई भी राशन दुकान में नहीं आया। भागीरथी साहू द्वारा बताया गया कि उनका स्वयं का और उनकी पत्नी का स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका छोटे पुत्र चेतन राशन लेने जाते थे। प्री-बोर्ड परीक्षा, प्रेक्टिकल, बोर्ड परीक्षा के बाद उसका स्वास्थ्य खराब होने के कारण राशन लेने के लिए राशन दुकान नहीं गए।
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