द सीजी न्यूज
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष तुलसी साहू ने आज कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पिछले कई विधानसभा चुनावों में टिकट की दावेदार रही हैं। इस बार भी तुलसी को भिलाई से टिकट मिलना तय माना जा रहा था। लेकिन मुकेश चंद्राकर को टिकट मिल गई। इसके बाद आज तुलसी साहू ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस्तीफे में तुलसी ने कहा है कि वे पिछले 32 साल से पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं। दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व निर्वहन करने के साथ ही भइलाई जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। प्रदेश कांग्रेस सचिव व बेमेतरा जिला प्रभारी सहित कई पदों पर कार्य किया।
कोरोना संकटकाल में मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए फंड की व्यवस्था, सूखा राशन व भोजन वितरण, अस्पतालों में मरीजों की सेवा, सरकार के निर्देशानुसार शिविर लगावाकर वैक्सीनेशन और अप्रवासी मजदूरों की भोजन व्यवस्था कार्यकर्ताओं के सहयोग से लगातार किया। पार्टी के लिए मेहनत करने के बावजूद उन्हें हमेशा उपेक्षा का शिकार होना पड़ा।
तुलसी ने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2000 में भिलाई नगर निगम के महापौर की टिकट के लिए कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रमुखता से रखा गया, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिली। 2010 में भी जिला और प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा टिकट देने की सिफारिश की गई लेकिन एक गृहणी निर्मला यादव को महापौर प्रत्याशी बनाया गया, जो अब भा.ज.पा में शामिल हो गई है।
2018 के वैशालीनगर विधानसभा में भी विधायक प्रत्याशी के रूप में दावेदारी के बावजूद ऐन वक्त पर प्रत्याशी बदल दिया गया। 2022 में उनका नाम राज्य सभा सांसद के लिए भेजा गया। चार धाम की यात्रा के दौरान कांग्रेस के प्रदेश सह प्रभारी चंदन यादव ने फोन पर बायोडाटा मांगा और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने चारधाम यात्रा से वापस बुलाया। लेकिन उन्हें राज्यसभा सांसद नहीं बनाया गया।
तुलसी ने कहा कि वर्ष 1999 से उनके पति कैंसर से पीड़ित रहे। 2008 में मृत्यु हो गई। कठिन समय के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी द्वारा दिये गये दायित्वों का निर्वहन किया। लेकिन कांग्रेस पार्टी में दल के प्रति निष्ठा के बजाए व्यक्ति निष्ठा को अधिक महत्व देिया जा रहा है। पार्टी द्वारा लगातार उनकी भावनाओं के साथ छल किया गया। इस विधानसभा चुनाव में भी वैशाली नगर विधान सभा से दावेदारी की, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। ऐसी स्थिति में उनका पार्टी में बने रहना असंम्भव हो गया है। इन कारणों से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता व समस्त पदों से त्याग पत्र देने का फैसला किया है।
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