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फर्जीवाड़ा : बिक चुकी जमीन का नामांतरण कराने के बाद दोबारा बेचा : कलेक्टर से शिकायत, जांच की मांग

THE CG NEWS

दुर्ग। शहर में जमीन के नाम पर फर्जीवाड़े का बड़ा खेल किया गया। पटरीपार में जिस जमीन की बिक्री हो चुुकी है, उसी जमीन का दोबारा नामांतरण कराया गया और अवैध प्लाटिंग करते हुए 35 लोगों को बेचा गया। लाखो रुपए देकर प्लाट खरीदने वाले खरीदारों की जमीन पर रजिस्ट्री के शून्य होने का खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में कलेक्टर से शिकायत की गई है। शिकायत के साथ पंजीकृत विक्रय पत्र, नामांतरण पंजी व विभिन्न क्रेताओं का विवरण भी दियाा गया है।

सिकोला बस्ती दुर्ग निवासी कृष्णाराम साहू आत्मज पूनाराम साहू द्वारा ग्राम करहीडीह प. ह. नं. 57 तहसील व जिला दुर्ग खसरा नं. 125/5 रकबा 0.631 हेक्टेयर (1.57 एकड़) भूमि को 21 अप्रेल 1993 को पंजीकृत बिक्री पत्र से परविन्दर सिंह, कुलविन्दर सिंह व हरविन्दर सिंह पिता स्व रणवीर सिंह चाने निवासी मालवीय नगर दुर्ग को विक्रय किया गया। बंदोबस्त के बाद नया खसरा नंबर 102 दर्ज किया गया।

शिकायत में कहा गया है कि परविन्दर सिंह, कुलविन्दर सिंह व हरविन्दर सिंह ने भूमि क्रय करने के बाद कब्जा प्राप्त कर लिया, लेकिन भूमि क्रय करने के बाद भूलवश अपने नाम पर नामांतरण नहीं करा पाए थे। कृष्णा साहू की मृत्यु होने के बाद गणेश, रमेश कुमार साहू मनोरमा साहू श्यामाबाई महेश साहू सभी पिता स्व. कृष्णा साहू का नाम राजस्व अभिलेख फौती नामांतरण के बाद दर्ज किया गया। पुत्र महेश साहू की मृत्यु के बाद पुन: नामांतरण दर्ज कराकर महेश साहू के वारिस के रूप में सरस्वती साहू का नाम नामांतरण पंजी 20 अगस्त 2019 में दर्ज किया गया।

कृष्णा साहू की पत्नी तिजिया बाई की मृत्यु होने के बाद पुन: राजस्व अभिलेख नामांतरण पंजी 15 जुलाई 2021 में फौती नामांतरण दर्ज किया गया। इस प्रकार कृष्णा साहू की मृत्यु होने के बाद उनके वारिसानों ने अपने नाम पर भूमि नामांतरण करा लिया। इसका गलत फायदा उठाकर गणेश गम वगैरह द्वारा प्रापर्टी डीलर मनोज गजपूत के साथ मिलकर सांठगांठ कर जमीन की बिक्री कर दी गई। मनोज राजपूत ने उक्त भूमि को बिना कॉलोनाइजर लाइसेंस और बिना ले आउट व बिना परीमशन करीब 35 लोगो को उपरोक्त भूमि को प्लाट बेच दिया।

एक बार विक्रय किए जा चुके भूमि का पुन: विक्रय अवैध व शून्य विक्रय की श्रेणी में आता है। दोबारा बिक्री में खरीदे गए 35 लोगों का विक्रय पत्रों के माध्यम से कोई हक व अधिकार प्राप्त नहीं होता। धोखाधड़ी छलकपट कूटरचना से की गई दुबारा बिक्री की सभी रजिस्ट्री शून्य घोषित हो सकती है। उस मामले में दोषी लोगों के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।

फर्जीवाड़े का शिकार हुुए लोग 

पहले से बिक चुकी जमीन की प्लाटिंग कर जिन 35 लोगों को दोबारा बेचा गया है, उसमें राजन कुमार दास पिता अशरफी लाल, हिमांशु चंद्राकर पिता हेमन्त कुमार, सोमी गुलेच्छा पति अमित गुलेच्छा, लक्ष्मीबाई पति जसराज तेजेश्वरी साहू पति भूषण लाल, जगनाथ प्रसाद पिता लक्ष्मीचंद वर्मा, महेश कुमार दुबे पिता रामकुमार, शांतीलाल जैन पिता खेतमल जैन, सैय्यद रिजवान अली पिता एजाज, जगदीश प्रसाद वर्मा पिता लक्ष्मीचंद सागर कुमार इंगले पिता अरुण कुमार, ध्रुव कुमार पंचभने पिता कौशिक, राम, कमलेश कुमार जैन पिता चंदन मान जैन रंजना सिंह पति मंगल सिंह, रीता सिंह राजपूत पति जितेन्द्र सिंह, शिवनारायण कुरील पिता स्व-दनकू प्रसाद, डाली चंद्राकर पिता विनय चंद्राकर, शिवनारायणकुरील पिता दनकू प्रसाद, उषा बाई जैन पति शांतिलाल जैन बिन्दु यादव पति नवीन यादव, सरोज देवांगन पति ललित कुमार देवांगन, सुप्रा मंडल पति रंजीत कुमार, लक्ष्मी बाई पति जसराज, नेहा वर्मा पति सौरभ कुमार, डोमेन्द्र कुमार यादव पिता गेंद राम यादव, विद्या पान्डे पति ज्ञान प्रकाश पान्डे दिनेश जैन पिता भोजराज जैन, नूतन कुमार जंघेल पिता लेखराम जंघेल, विनीता जैन पति कमलेश जैन, गुरुजीत सिंह परमार, लक्ष्मी बाई पति जसराज, गायत्री साहू पति अजय साहू नीतू देवी पति कर वकील प्रसाद शाह दिनेश जैन पिता भोजराज जैन यमन कुमार देवांगन पिता सुरेन्द्र कुमार शामिल है। इन सभी लोगों को जमीनों की बिक्री वर्ष 24 से 25 के बीच की गई।

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