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कप्तान बदलने के पक्ष में नहीं हैं छत्तीसगढ़ के कांग्रेस विधायक : प्रदेश की जनता भी नहीं चाहती परिवर्तन

द सीजी न्यूज डॉट कॉम

छत्तीसगढ़ में बेहद सशक्त कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस सरकार में अचानक सत्ता को लेकर घमासान तेज हो गया है। ढाई-ढाई साल के कार्यकाल का मुद्दा उफान पर है। इस मुद्दे को उठाने वाले प्रदेश के पंचायत और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव दिल्ली में डटे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से चर्चा करने के बाद  छत्तीसगढ़ लौट चुके हैं। भूपेश के लौटने के बाद 26 अगस्त को कांग्रेस के 50 से ज्यादा कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंचे और संदेश दे दिया कि वे किसी भी हालत में नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में नहीं हैं। इसी सिलसिले में आज 27 अगस्त को कई मंत्रियों, विधायकों के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दोबारा दिल्ली रवाना हो रहे हैं।

इधर, राजनीतिक तूफान के बीच टीएस सिंहदेव का बयान आया है कि टीम का हर खिलाड़ी कैप्टन बनना चाहता है। ऐसी इच्छाशक्ति रखना कोई गलत बात नहीं है। मगर, राजनीतिक हलकों में यह सवाल किया जा रहा है कि जब टीम में कुशल कप्तान हो। बैटिंग, बालिंग, फील्डिंग के मामले में पूरी तरह फिट और योग्य  हो। जब कप्तान अपने धारदार बयानों से विपक्ष की हर गेंद पर चौके-छक्के उड़ा रहा हो। अपने राज्य के विकास मॉडल से मैच दर मैच जीत चुका हो। कप्तान की कामयाबी का डंका जब देश और दुनिया में बज रहा हो … तब … क्या टीम का कोई भी खिलाड़ी ऐसे कप्तान को बदलना चाहेगा? क्या टीम मैनेजमेंट ऐसे कप्तान को बदलने का फैसला करेगा ?

बीते ढाई साल में कोरोना संकटकाल से निपटने में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की भूमिका कितनी कमजोर रही, यह पूरा प्रदेश जानता है। उस दौर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कुशल नेतृत्व और बेहतरीन प्रबंधन ही कोरोना को नियंत्रित करने में कारगर साबित हुआ। मरीजों के इलाज से लेकर कोरोना पीड़ितों को राहत देने के हर फैसले में मुख्यमंत्री की भूमिका सशक्त और संवेदनशील रही। सिंहदेव इस संकट के सीन में कभी कभार ही नजर आए। संकट से निपटने में उनकी भूमिका बेहद कमजोर रही। जब सिंहदेव अपना खुद का विभाग ही नहीं संभाल पाए तो समूचे प्रदेश की कमान किस तरह संभालेंगे? इस सवाल पर सिंहदेव को गहन विचार-मंथन करना चाहिये।

सच ये है कि राज्य की सत्ता हासिल करने की ललक में सिंहदेव अपने क्रियाकलापों से छत्तीसगढ़ में बेहद मजबूत और शक्तिशाली कांग्रेस पार्टी को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। समूचा संगठन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ है। इक्का दुक्का विधायकों को छोड़कर सभी विधायक भूपेश बघेल के साथ हैं। प्रदेश की जनता भूपेश बघेल के साथ है।

सिंहदेव के लिये यह बेहतर होता कि कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की चिंता करते। मगर, वे अपना मंत्रालय का कामकाज छोड़कर मुख्यमंत्री बनने की ललक में दिल्ली दौड़ लगा रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री पद हासिल करने के लिये ऐसा लालच उचित है ?

प्रदेश के साथ दिल्ली के सियासी हलकों में सभी जानते हैं कि पिछले चुनाव में बेहद ताकतवर रही भारतीय जनता पार्टी को भूपेश बघेल के जुझारू नेतृत्व में ही कांग्रेस ने चारों खाने चित किया था। कांग्रेस विधायकों और संगठन पदाधिकारियों को पक्का यकीन है कि अगला चुनाव केवल भूपेश बघेल के नेतृत्व में ही दमदारी से जीता जा सकता है और राज्य में किसी भी तरह का बदलाव कांग्रेस के लिये बेहद घातक साबित होगा।

लिहाजा, कांग्रेस हाईकमान को अब कड़े संदेश देना जरूरी है। कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं, विधायकों के साथ पौने दो करोड़ जनता के हितों का ध्यान रखकर यह तय करना जरूरी है कि नेतृत्व में कोई फेरबदल नहीं होगा। अनुशासन कायम रखने के लिये छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार को बार-बार अस्थिर करने वाली ताकतों पर सख्त नकेल कसना भी जरूरी है।

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