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राजनांदगांव / छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने आज जिला पंचायत सभाकक्ष में राजनांदगांव जिले से आयोग को प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई की। आयोग के पास दहेज प्रताडऩा, कार्य स्थल पर प्रताडऩा, मारपीट, सम्पत्ति, तलाक और भरण-पोषण के विभिन्न मामले आते है। डॉ. नायक ने कहा कि महिलाएं अत्याचार सहने के लिए नहीं है। किसी भी पुरूष को यह अधिकार नहीं है कि महिला पर अत्याचार करें और उसे प्रताडि़त करें। यदि कोई महिला अत्याचार सिर्फ इसलिए सह रही है कि वह महिला या पत्नी है और अत्याचार सहना उसकी नियति है, तो वह पुरूष को प्रोत्साहन देने के बराबर है। महिलाओं को अपने हक के लिए आवाज उठानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक द्वारा एक प्रकरण की सुनवाई की गई जिसमें आवेदिका द्वारा सोशल मीडिया पर टीका-टिप्पणी करने की शिकायत की गई थी। आयोग द्वारा सुनवाई के दौरान अनावेदक द्वारा माफी मांगी गई और भविष्य में इस तरह की टीका-टिप्पणी न करने की बात कही। आयोग द्वारा अनावेदक को यह समझाईश दी गई कि आवेदक या परिवार के खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी करने पर आवेदिका द्वारा साइबर थाना में रिपोर्ट की जाएगी।
एक अन्य प्रकरण में पत्नी ने बताया कि अनावेदक ने उसके साथ धोखाधड़ी करते हुए समझौतानामा बनाकर अपना प्रकरण वापस कराया। बहाल होने के बाद आवेदिका के साथ फिर से मारपीट और दुर्व्यवहार करने लगा। पत्नी इस मामले में अपने पति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा चाहती है। पति पत्नी के मध्य आपसी प्रकरण न्यायालय में प्रक्रियाधीन है। आयोग द्वारा आवेदिका को समझाईश दिया गया कि वह अधिवक्ता के माध्यम से अपने प्रकरण को जिम्मेदारी से लड़े और सक्षम न्यायालय में अपना अधिकार प्राप्त करें।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने पति के मृत्यु के बाद पति की सम्पत्ति में हक पाने के लिए आयोग में शिकायत किया था। अनावेदक आवेदिका के देवर है जो शासकीय सेवा में है। अनावेदक की शर्त है कि मृत भाई के नाम का पैसा व अन्य वस्तुएं तीनों बच्चों के नाम पर करने तैयार है। आवेदिका की उन सभी वस्तुओं को, जो अनावेदक के पास है, उसे आवेदिका के घर पहुंचाकर देगा और शेष जमा राशियों का दस्तावेज 4 अक्टूबर को आयोग कार्यालय रायपुर में उपस्थित होकर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। आवेदिका ने आयोग को बताया कि उसने पति के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर एफडी का तीन लाख नब्बे हजार रुपए प्राप्त कर लिया है, जो कि बैंक खाते में है। आयोग ने आवेदिका को निर्देशित किया कि तीनों बच्चों के नाम पर एक-एक लाख रूपए की एफडी कराकर उसका प्रमाण पत्र लेकर आयोग कार्यालय में उपस्थित होने कहा गया। इस प्रकरण में अंतिम निराकरण आयोग कार्यालय में होगा।
आयोग में सुनवाई के लिए कुल 19 प्रकरण मेें से 12 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता शमीम रहमान और जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास रेणु प्रकाश सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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