
द सीजी न्यूज डॉट कॉम
नगरीय निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। 20 दिसंबर को मतदान होने से पहले राजनीति के पारे में कई बार उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। लेकिन, राजनीतिक सूत्रधारों का कहना है कि तीनों निकाय चुनाव न तो प्रदेश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस के लिए आसान होंगे और न ही केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए। लेकिन शुरुआती चुनावी गणित में कहा जा रहा है कि कांग्रेस का पलड़ा भारी रहेगा। खास तौर पर रिसाली में कांग्रेस की जीत अभी से पक्की मानी जा रही है। भिलाई नगर निगम और चरौदा निगम की तुलना करें तो चरौदा निगम चुनाव में कांग्रेस की राह चुनौती भरी होने के बावजूद अंतत: गुड न्यूज ही मिलेगी। राजनीति पर पैनी नजर रखने वालों का कहना है कि भिलाई नगर निगम में ऊंट किस करवट बैठेगा, इस पर कयास लगाना कठिन होगा।
चरौदा निगम क्षेत्र पीएचई मंत्री रुद्र गुरू का विधानसभा क्षेत्र है। यहीं पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का निवास है। मुख्यमंत्री बनने के बाद चरौदा निगम की राजनीतिक तस्वीर में काफी बदलाव आए हैं। कांग्रेस का प्रभाव बढ़ा है। हालांकि बीते वर्षों में कांग्रेस के लिए अच्छे अनुभव नहीं रहे।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छवि का फायदा इस निकाय को मिलेगा। यहां कई प्रमुख योजनाओं की घोषणा की गई है जिसके कारण कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है।
गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रिसाली नगर निगम के गठन के बाद से यहां कांग्रेस की राजनीति पूरे उफान पर रही है। ताम्रध्वज के अलावा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री व ताम्रध्वज साहू के पुत्र जितेंद्र साहू की सक्रियता का बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के कारण और गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों के कारण रिसाली नगर निगम लगातार सुर्खियों में रहा है। इसका कुछ हद तक नुकसान भी हो सकता है। कांग्रेस के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि यहां भाजपा का ढांचा काफी कमजोर है। इसका फायदा भी कांग्रेस को ही मिलेगा।
भिलाई नगर निगम के अंतर्गत दो विधानसभा क्षेत्र आते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो में से एक सीट मिली जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र यादव मामूली अंतर से जीत दर्ज कर पाए। दोनों विधानसभा को मिलाकर बने नगर निगम क्षेत्र में कांग्रेस का कब्जा पिछले दो चुनाव में रहा है। लेकिन इस बार तस्वीर का रुख क्या होगा? कह पाना मुश्किल है।
सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा सरकार में केबिनेट मंत्री रहे प्रेम प्रकाश पांडेय ने ग्राउंड लेवल पर काफी मेहनत की है। पिछले कार्यकाल में महापौर और टाउनशिप के विधायक देवेंद्र यादव ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अपनी छवि चमकाने में बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाए हैं। उनके समर्थक जितनी तादाद में बढ़ते हैं, उतने ही समर्थक साथ भी छोड़ रहे हैं। टाउनशिप में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बताया जा रहा है लेकिन पटरीपार में भाजपा विधायक विद्यारतन भसीन की निष्क्रियता के बावजूद यहां आरएसएस के समर्थक बड़ी तादाद में हैं। यहां यूपी बिहार से आकर बसे करीब एक लाख वोटर हैं। इन्हीं वोटरों पर भिलाई का भाग्य टिका है।
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