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50 लाख खर्च के बावजूद आरटीपीसीआर जांच की सुविधा शुरू नहीं : 5 महीने से बंद पड़ा है वॉयरोलॉजी लैब : विधायक वोरा ने नाराजगी जताई

द सीजी न्यूज डॉट कॉम

दुर्ग। मार्च-अप्रैल में कोरोना के कहर से सैकड़ों लोगों की मौत के दौरान कोरोना की जांच कर तत्काल रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए दुर्ग जिला मुख्यालय में 50 लाख की लागत से वायरोलॉजी लैब का निर्माण शुरू किया गया। भवन बनकर तैयार है। लेकिन, जांच के लिए जरूरी मशीनें, इक्युपमेंट की सप्लाई छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन से नहीं की गई हैं। वॉयरोल़ॉजी लैब महीनों से बंद पड़ा है। लोगों को आरटीपीसीआर जांच की सुविधा नहीं मिल रही है। विधायक अरुण वोरा ने आज लैब का निरीक्षण करते हुए तत्काल लैब शुरू करने और कोरोना के संदिग्ध मरीजों की आरटीपीसीआर जांच शुरू करने के निर्देश दिये हैं।   

वोरा ने कहा है कि कोरोना महामारी ने प्रदेश में हजारों लोगों की जान ली है। महामारी से निपटने के लिए सजगता के साथ तेज गति से काम करना जरूरी है। सुस्त चाल से काम करके महामारी से नहीं निबटा जा सकता है। वोरा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जीएस ठाकुर से कहा है कि लैब के लिए आवश्यक मशीनें व अन्य संसाधन तत्काल उपलब्ध कराएं और लैब में आरटीपीसीआर जांच प्रारंभ कराएं। आरटीपीसीआर जांच के लिए अभी भी एम्स में सैंपल भेजा जा रहा है, जिसके कारण रिपोर्ट आने में समय लगता है। दुर्ग का वायरोल़जी लैब शुरू होने पर जांच रिपोर्ट तत्काल मिलने से समय पर उपचार की सुविधा मिलेगी और कोरोना नियंत्रण में मदद मिलेगी।

वोरा ने कहा कि कोरोना के नए वेरियंट ओमिक्रॉन की दहशत के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग और प्रदेश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने ज्यादा से ज्यादा लोगों की कोरोना जांच कराने के निर्देश दिये हैं। इसके बावजूद दुर्ग जिले में अभी तक जांच के लिए वायरोलॉजी लैब की सुविधा शुरू न होना दुर्भाग्यजनक है। लोगों को आरटीपीसीआर जांच के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ रहा है। वे इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से चर्चा करेंगे। जांच के लिए जरूरी मशीनरी व इक्युपमेंट तत्काल सप्लाई करने के लिए कहा जाएगा।

वोरा ने जिला अस्पताल परिसर स्थित आक्सीजन प्लांट का भी निरीक्षण किया

इधर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जीएस ठाकुर का कहना है कि लैब में सुविधाएं न होने के कारण अब वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चंदूलाल हास्पिटल में आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था की जा रही है। एक-दो दिनों के भीतर लोगों को निशुल्क आरटीपीसीआर जांच की सुविधा मिलने लगेगी। लैब निरीक्षण के दौरान महापौर धीरज बाकलीवाल, डॉ. खंडेलवाल, एमआईसी मेंबर भोला महोबिया, एल्डरमैन राजेश शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अजय मिश्रा, रमेश श्रीवास्तव, जीवनदीप समिति के सदस्य दिलीप सिंह ठाकुर मौजूद थे।

दूसरे देशों से आए 66 लोग, चार लोगों का अता-पता नहीं 

वोरा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से कोरोना के मरीजों की संख्या, जांच, आइसोलेशन और इलाज से संबंधित जानकारी भी ली। सीएमएचओ डॉ. ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में जिले में कोरोना के 52 मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है। 27 नवंबर के बाद से 66 लोग विदेश से आए हैं। इसमें से 4 लोगों का पता नहीं चल पाया है। शेष लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। 8 दिनों तक होम आइसोलेशन में रखने के बाद आरटीपीसीआर जांच की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने पर वेरियेंट की जांच की जाएगी। अभी तक जिले में ओमिक्रोन का एक भी मरीज नहीं मिला है।

पोटिया स्वास्थ्य केंद्र का काम क्यों लटका : वोरा ने अफसरों को जवाबतलब किया

वोरा ने पोटिया स्थित स्वास्थ्य केंद्र का भवन निर्माण पिछले एक साल से बंद होने पर भी नाराजगी जताई है। वोरा ने कहा कि पोटिया स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण पूरा न होने के कारण लोगों को सुविधायुक्त स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। उन्होंने पीडब्लूडी अफसरों को जवाबतलब करते हुए कहा है कि आखिर किस वजह से काम रोका गया? उन्होंने तत्काल भवन निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिये हैं।

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