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जैविक खेती अपनाकर खेमलाल ने समृद्धि की ओर बढ़ाए कदम : प्राचीन पैगम्बरी सोनामोती गेहूं, ब्लैक राइस, रेड राइस, ग्रीन राइस, बासमती, विष्णु भोग की ले रहे फसल

  • जैविक विधि से पोषक तत्वों से भरपूर प्राचीन पैगम्बरी सोनामोती गेहूँ, देशी बंशी गेहूँ, जिंक बायो फोर्टिफाइड गेहूँ, ब्लैक राइस, रेड राइस, ग्रीन राइस, ज़िंक राइस, बासमती, काला नमक किरण, विष्णुभोग, श्यामला, लायचा धान की ले रहे उपज
  • गोधन वर्मी कम्पोस्ट का कर रहे उपयोग
  • जैविक उत्पाद स्वास्थ्य के लिए है लाभप्रद, कई बीमारियों में विशेष है उपयोगी

द सीजी न्यूज डॉट कॉम

जैविक खेती को अपनाकर डोंगरगांव विकासखण्ड के ग्राम सोमाझिटिया के प्रगतिशील कृषक खेमलाल देवांगन ने समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। कृषि विभाग के कृषि मेला में पहुंचने पर उनके जीवन में परिवर्तन आया। वहां वेस्ट डी कम्पोजर के कल्चर निःशुल्क प्रदान किये जा रहे थे। वैज्ञानिक पद्धति से कृषि करने के विचारों को सुनकर वे प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि लघु धान्य फसलों को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदने की पहल सराहनीय है।

खेमलाल अपने खेतों में जैविक विधि से पोषक तत्वों से भरपूर प्राचीन पैगम्बरी सोनामोती गेहूँ, देशी बंशी गेहूँ, जिंक बायो फोर्टिफाइड गेहूँ, काला गेहूँ (शुगर फ्री), खपली गेहूँ, ब्लैक राइस, रेड राइस, ग्रीन राइस, ज़िंक राइस, बासमती, काला नमक किरण, विष्णुभोग, श्यामला, लायचा धान की उपज ले रहे हैं, जिनकी मार्केट में काफी डिमांड है और वे अन्य राज्यों में भी निर्यात कर रहे हैं। ये जैविक उत्पाद स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं और कई बीमारियों में विशेष उपयोगी हैं।

कृषक खेमलाल देवांगन ने कृषि विभाग के सहयोग से नलकूप खनन योजनांतर्गत एक नलकुप खनन कराया है, जिसमें अस्थायी विद्युत कनेक्शन लेकर लगभग 8 एकड़ जमीन की सिंचाई कर रबी सीजन में काला गेंहूॅं, शरबती गेहूं और गेहूं की प्राचीन व देशी वेरायटी में प्राचीन पैगंबरी सोना मोती गेहूं, देशी बंसी गेहूं की फसल पूर्ण जैविक विधि से लेने लगे। इससे फसल क्षेत्र में वृद्धि हुई और जैविक गेहूं के बीज और  आटा की मार्केटिंग से आय में वृद्धि हुई। उन्होंने बताया कि सरकार ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत धान की सुंगधित वेरायटी लगाने पर इनपुट सब्सिडी देने का प्रावधान किया है। उन्होंने 4.36  एकड़ खेत पर सुगंधित धान की फसल लगाकर इस योजना में सहभागिता निभाई है। उन्हें लगभग 40 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त होगा, जो अतिरिक्त आमदनी होगी।

पहले वे अपनी पैतृक जमीन पर वर्षा आधारित धान की फसल रासायनिक खेती करते थे। बाद में धान की रासायनिक खेती में वेस्ट डिंकपोजर के कल्चर का उपयोग सिंचाई में करने यूरिया, डीएपी और पोटाश की कम मात्रा में उपयोग करने के बावजूद उत्पादन प्रभावित नही हुआ। धान की बालियों की लंबाई, दानों का वजन, कटाई तक धान के पौधे का न गिरना जैसे आश्चर्यजनक परिणाम से प्रभावित होकर वे जैविक खेती की ओर अग्रसर हुए। शासन की नरवा, घुरवा, गरुवा, बाड़ी योजना के अंतर्गत गोधन वर्मी कम्पोस्ट और सुपर कंपोस्ट खरीदकर जैविक खेती में मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए उपयोग कर रहे हैं।

वेस्ट डिंकपोजर की सहायता से 200-200 लीटर के ड्रम में तैयार तरल घोल को खेतों तक ले जाने में कठिनाई को देखते हुए उन्होंने 8 एकड़ में चौड़ा रास्ता बनाया और बोरवेल पंप के बाजू में एक पंप हाउस का निर्माण कराया, ताकि सभी जैविक तरल घोल को ड्रम में बनाकर खेतों और  फसलों पर सिंचाई या स्प्रे के माध्यम से आसानी से दे सकें। बोरवेल पंप को मोबाइल से कॉल करके चालू व बंद करने मोबाइल पंप स्टार्टर इंस्टाल किया। इस स्टार्टर को खेत में मौजूद न रहने पर भी दुनिया के किसी भी कोने से मोबाइल नेटवर्क होने पर पंप को चालू और बंद किया जा सकता है। बिजली बंद होने पर आपरेट किया जा सकता है।

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