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भूपेश राज में लौटा … छत्तीसगढ़ का स्वर्ण काल …


द सीजी न्यूज डॉट कॉम

छत्तीसगढ़ में आज भूपेश सरकार के तीन साल पूरे हो गए। राज्य निर्माण के बाद से दो दशकों के कार्यकाल का इतिहास खंगालें या अविभाजित मध्यप्रदेश और इससे पहले के छत्तीसगढ़ पर नजर डालें तो पता चलेगा कि धान के कटोरे में विकास और व्यक्ति-विकास की ऐसी सशक्त और रंग-बिरंगी तस्वीर पहले कभी नहीं उकेरी गई। तीन साल में राज्य के विकास के साथ ही व्यक्तियों के विकास के जो काम किये गए … वे बेमिसाल हैं … लाजवाब हैं …
अभी पिछले दिनों कवर्धा और रायपुर में धर्म और समाज के संगठित गिरोहों ने झंडे उतारने और उसके बाद माहौल बिगाड़ने के प्रायोजित कार्यक्रम को अंजाम दिया। इसके बाद ट्वीटर पर भक्तों ने ट्रेंड करना शुरू कर दिया कि छत्तीसगढ़ में मुगल काल लौट आया है। अरे भक्तों … छत्तीसगढ़ में मुगल काल न तो आज लौटा है, न कभी भविष्य में लौटेगा … सच ये है कि छत्तीसगढ़ में स्वर्ण काल लौट आया है। भूपेश राज के तीन साल का कार्यकाल हर लिहाज से स्वर्ण काल ही कहा जाएगा।

किसका स्वर्ण काल … राज्य के विकास का या उच्च वर्ग का … या गरीब-गुरबों का … किसानों-आदिवासियों-महिलाओं का … कहां से शुरू करें स्वर्ण काल की गाथा …

राज्य निर्माण के बाद से 2018 तक दो दशकों की पत्रकारिता के दौरान ग्रामीण जिंदगी और वहां की समस्याओं, सुविधाओं की रिपोर्टिंग के लिए दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा, बेमेतरा, बस्तर, रायपुर जिले के दर्जनों गांवों का दौरा किया। छोटे, सीमांत किसानों से लेकर दाऊ कहलाने वाले बड़े किसानों तक हर वर्ग के लोगों से बातचीत की। गरीब-गुरबों से चर्चा की। कहीं पर भी गांव में रहने वाले ग्रामीण या किसान खुशहाल नहीं दिखे। हरेक के चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आए।
मगर, आज छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल हैं। पहली बार … किसान इतने खुशहाल हुए हैं। तीन साल पहले कर्जमाफी के ऐलान के बाद किसानों के चेहरे खिले और 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी से उनकी जिंदगी पर खुशियों की चमक बिखरने लगी। गौठान को रूरल इंजीनियरिंग पार्क बनाने, रोका-छेका अभियान, भूमिहीन किसान-मजदूरों के लिए राजीव गांधी भूमिहीन किसान न्याय योजना जैसी कई योजनाओं से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। किसानों को उम्मीद हैं कि भूपेश राज में समृद्धि की स्वर्णिम आभा अभी और बिखरेगी।
तीन साल पहले पिछली सरकार के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित कई पूर्व मंत्रियों ने किसानों की कर्जमाफी और 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी को असंभव बताया था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शपथ ग्रहण के फौरन बाद … सिर्फ एक घंटे के भीतर … इस असंभव काम को संभव कर दिखाया। लगातार तीन साल से वे इस असंभव काम को संभव कर रहे हैं। और …छाती ठोंककर भूपेश बघेल हुंकार भी भर रहे हैं – हमारी सरकार चट्टान की तरह किसानों के साथ खड़ी रहेगी। कोई ताकत हमें अपने रास्ते से डिगा नहीं सकती।

छत्तीसगढ़ राज्य का स्वर्णकाल सिर्फ गांव, किसान और गोधन न्याय योजना तक ही सीमित नहीं है। अभावों और गरीबी से जूझते लाखों आदिवासी परिवारों से वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी करने का फैसला लेकर भूपेश सरकार ने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के जीवन में आर्थिक क्रांति लाने का काम किया है। इस फैसले की चमक कभी मिट नहीं सकती। पिछली सरकारों ने किसानों और आदिवासियों के साथ क्या किया? यह किसी से छिपा नहीं है। (अगर भूल गए हों तो आदिवासियों को जर्सी गाय बांटने की योजना, खाड़ी से नहीं बाड़ी से डीजल, चरणपादुका वितरण, किसानों को 3 सौ रुपए बोनस देने जैसी योजनाओं के चौपट होने और 15 साल के राज में करप्शन की विराट – विशाल कहानियों का स्मरण कर लें।)

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब राज्य के झोपड़पट्‌टी में रहने वाले गरीब-गुरबों से लेकर छत्तीसगढ़ के धनाढ्य धन-कुबेरों की जेब में भी भूपेश सरकार ने पैसे डालने का काम किया। बिजली बिल हाफ योजना के जरिये सिर्फ मध्यम-निम्न वर्ग को बिजली बिल से राहत नहीं मिली, बल्कि इसका लाभ कुलीन तबके को भी मिला। पिछले तीन साल में राज्य के हर अमीर-गरीब के राशन कार्ड बने हैं। सस्ती दर पर राशन भी मिल रहा है। पिछली रमन सरकार ने तो एपीएल वर्ग के राशन कार्डों की व्यवस्था को ही खत्म कर दिया था।
कोरोना काल की भयावहता के पहले दौर यानी 2020 में स्वर्ण काल की ऐसी आभा बिखरी, जिसे लोग अक्सर भूल जाते हैं। इस दौर में भूपेश सरकार ने जिस संवेदनशीलता के साथ छत्तीसगढ़वासियों के साथ ही दीगर राज्यों के लोगों की मदद की, उसकी कोई मिसाल नहीं मिलती। बिहार में सुशासन कुमार कहे जाने वाले मुख्यमंत्री ने कोरोना के भय से अपने राज्य के मजदूरों के वापस लौटने पर ही पाबंदी लगा दी थी। उत्तर प्रदेश में जब कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने मजदूरों को वापस लाने के लिए बसों की व्यवस्था की, तब योगी महाराज और यूपी के मंत्रियों ने इसका जमकर विरोध किया। योगी के इशारे पर दिल्ली बार्डर में खड़ी बसों के पहिये की हवा निकाली गई। प्रियंका की बसों को यात्रा के लिए अनफिट घोषित करने से लेकर तमाम हथकंडे अपनाए गए।
लेकिन … छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने राज्यों के मजदूरों को वापस लाने के लिए न सिर्फ बसों, यात्री ट्रेनों की व्यवस्था की, बल्कि मुसीबत में फंसे मजदूरों को दूसरे राज्यों में पैसे भेजने की व्यवस्था की … राज्य में वापस लौटे भूखे प्यासे मजदूरों के लिए नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे में जगह-जगह लंगरखाने खोल दिये गए … मजदूरों और उनके बीबी-बच्चों के पैरों को चप्पल पहनाने की फिक्र में भी जुटी रही सरकार … छत्तीसगढ़ से गुजरने वाले दूसरे राज्य के मजदूरों को भी भोजन-नाश्ते के पैकेट दिये गए … उनको राज्य की सीमा तक छोड़ने के लिए बसों की व्यवस्था की गई … गरीब-गुरबों के प्रति ऐसी संवेदनशीलता मुल्क के किसी और राज्य में देखने नहीं मिली।

छत्तीसगढ़ के स्वर्णकाल की तहरीर उन कुपोषित बच्चों के बिना अधूरी है, जिनके लिए खुद भूपेश बघेल ने कहा था कि कुपोषित बच्चे और एनीमिया का शिकार महिलाएं किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्म का विषय हैं। छत्तीसगढ़ की करीब एक तिहाई आबादी अभावों, भरपेट पौष्टिक भोजन न मिलने की समस्या का सामना दशकों तक करती रही, लेकिन पूर्व सरकारों की संवेदनशीलता मृतप्राय रही। तीन साल के भूपेश राज में छत्तीसगढ़ में कुपोषित बच्चों की संख्या 26 प्रतिशत से घटकर 19 रह गई है। यह कोई सामान्य आंकड़ा नहीं है। प्रादेशिक या राष्ट्रीय स्तर पर हर साल बमुश्किल एक या आधा प्रतिशत कुपोषण की दर घटने-बढ़ने के आंकड़ों की तुलना में भूपेश सरकार की यह उपलब्धि किसी चमत्कार से कम नहीं है।
वजन त्योहार में कुपोषित बच्चों की श्रेणी से सुपोषण की श्रेणी में आने के बाद उन मासूम बच्चों की माताओं से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कितनी दुआएं बटोरते होंगे, इसका अंदाज कोई माई का लाल नहीं लगा सकता।

राज्य की महिला शक्ति के सपनों को उड़ान भरने भूपेश सरकार ने कितने विशाल पंख दिये, यह पूरी दुनिया देख रही है। आज महिला समूहों के बनाए दीये और घर के सजावटी सामान सिर्फ दिल्ली, मुंबई ही नहीं बल्कि लंदन, कतर, दुबई सहित यूरोप के कई देशों के साथ में भी सज रहे हैं। गौठानों में महिलाएं गोबर से पेंट बनाने का उद्यम शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं। गोबर से बिजली और वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से ग्रामीण स्वावलंबन का नया इतिहास लिखा जा रहा है। सरकारी संस्थानों में भर्ती शुरू करने से बेरोजगारों को रोजगार देने के साथ ही स्वरोजगार के नए आयाम खोले जा रहे हैं।
और भी बहुत कुछ है लिखने को … आज फिलहाल इतना ही …
राज्य के अनगिनत गरीब-गुरबों, मजदूरों, दीन-दुखियारों के प्रति आपकी संवेदनशीलता और सेवा भावना को सलाम …
किसानों, आदिवासियों, महिलाओं की आर्थिक तरक्की के रास्ते खोलने के आपके जज्बे को प्रणाम …
राज्य की तरक्की, विकास के साथ व्यक्ति-विकास का मिशन जारी रखने के महाअभियान को नमन …

विकास के साथ मानव सेवा के उत्कृष्ट कार्यों की स्वर्ण काल की आभा अगले दशकों … सदियों तक … छत्तीसगढ़ राज्य में निरंतर बिखरती रहे … यही कामना है …

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