द सीजी न्यूज
बलरामपुर जिले के कोंचली ग्राम की सुनीता कुम्हरिया और उसके तीन बच्चों की यह तस्वीर देखिये … इन चारों के चेहरे पर मुफलिसी के अनगिनत निशान हैं। इनके कपड़े, इनके चेहरे और इनके हाल देखकर सहज अंदाज लगा सकते हैं कि ये समाज के बेहद गरीब तबके का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन … सरकारी सिस्टम ने जिस नंबर का चश्मा पहन रखा है, उस चश्में से अफसरों को इन गरीबों की मुफलिसी दिखाई नहीं देती।
शायद यही वजह है कि इनके पास वर्षों से बीपीएल कार्ड नहीं है। इनके पास वही एपीएल कार्ड है जो राज्य के धनाढ्य या मिडिल क्लास के पास है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार को बलरामपुर जिले के दौरे पर थे। आम जनता से भेंट मुलाकात के दौरान ग्राम डौरा में कोचली ग्राम निवासी सुनीता ने राज्य के सुपर पावर के सामने खड़े होकर गरीबी रेखा का राशन कार्ड बनाने की विनती की। अपनी आर्थिक परेशानी बताते हुए मुख्यमंत्री से फरियाद की। गरीबों के लिए हमेशा से संवेदनशील रहे मुख्यमंत्री ने सुनीता की विनती को गंभीरता से लिया। अफसरों को तत्काल राशनकार्ड जारी करने के निर्देश दिये।
सीएम के निर्देश के बाद अफसरों ने जब परीक्षण किया तो उन्हें सुनीता बीपीएल श्रेणी के लिए पात्र नजर आने लगी। अगली सुबह यानी आज शुक्रवार को खाद्य विभाग के अफसरों ने बीपीएल राशन कार्ड जारी कर दिया। अफसरों ने महिला के घर तक राशन कार्ड पंहुचाया। राशन कार्ड मिलने के बाद सुनीता ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
बड़ा सवाल ये है कि सीएम के निर्देश मिलने पर अफसरों के चश्मे का नंबर अचानक कैसे बदल गया।
इन मुफलिसों की मायूस जिंदगी प्रशासन को पहले क्यों नहीं दिखी ??? बीपीएल कार्ड पहले क्यों नहीं बनाया ?
अगर राज्य के मुखिया भूपेश बघेल गरीबों के लिए संवेदनशील हैं तो प्रशासनिक मशीनरी का बड़ा तबका इतना बेरहम … इतना असंवेदनशील … इतना निष्ठुर क्यों है ?
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