द सीजी न्यूज 

बीते तीन दशकों से नक्सलियों के बम-धमाकों और गोलियों से दहलते-थर्राते बस्तर की फिजा बदलने लगी है। भूपेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का यहां सिर्फ जबर्दस्त असर नहीं हुआ … बल्कि एक तरह से जादू चला है। साढ़े तीन साल पहले बस्तर ब्लाक के तारापुर गांव की द्रौपदी ठाकुर ने सरकार की कर्जमाफी योजना का लाभ उठाने के साथ ही 6100 महिला किसानों का संगठन खड़ा कर दिया। संगठन का नाम दिया गया – ‘भूमगादी‘ महिला किसान उत्पादक संघ। इस संगठन ने छत्तीसगढ़ में महिला स्वावलंबन का नया इतिहास रच दिया है। 

भूमगाद – यहां भूम का मतलब है जमीन और गादी का अर्थ है जमीन से निकलने वाला पदार्थ। वर्षों से वनोपज इकट्‌ठा करने वाली और औने पौने दाम में बेचने वाली बस्तर की महिलाओं को पता है कि आदिवासियों के पास कृषि और वन उत्पाद तो हैं, लेकिन वो इन्हें बेचने में सक्षम नहीं हैं। इन परिस्थितियों में महिलाओं ने खुद को सक्षम बनाने की ठानी। भूमगाद की बुनियाद रखने के साथ ही इतिहास रचने वाली द्रौपदी ठाकुर ने महिला किसानों को संगठित करने का जिम्मा उठाया। तीन जिलों के 9 विकासखंडों में 6100 महिला किसानों को एकजुट किया।  

इन महिलाओं ने अपने-अपने गांवों में कृषि और वन उत्पादों को समर्थन मूल्य पर खरीदना शुरू किया। ‘भूमगादी‘ संगठन की महिलाओं ने किसानों से इमली, कोदो-कुटकी, हल्दी, मिर्ची समर्थन मूल्य पर खरीदा और फिर वैल्यू एडिशन के बाद  पैकेजिंग करना शुरू किया। इस प्रोडक्ट को जगदलपुर के हरियाली बाजार में ले जाकर बड़े व्यापारियों को बेचने से किसानों को उनकी उपज की सही दाम भी मिला और भूमगादी की महिला किसानों को मुनाफे का लाभांश भी मिला।

बकावण्ड में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान द्रौपदी ठाकुर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अपने संघर्ष और सफलता के किस्से सुनाते हुए कहा कि महिला भूमगादी किसान उत्पादक संघ ने पिछले साल साढ़े चार करोड़ रुपए के प्रोडक्ट बाजार में बेचे हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों में कुल टर्नओवर लगभग 10 करोड़ रुपए का हो चुका है। किसान उत्पादक संघ के पास खुद का 5 टन का कोल्ड स्टोरेज है, जिसमें वो अपने उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखती हैं। भूमगादी महिला स्व-सहायता समूह के ब्रांडनेम ‘हरियर बस्तर’ को आईएसओ का दर्जा भी मिला हुआ है।

मुख्यमंत्री ने द्रौपदी ठाकुर के साथ ही 6100 महिला किसानों की उपलब्धियां सुनने के बाद उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण लाने के लिए समर्थन मूल्य पर खरीदे  जाने वाले लघु वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 65 कर दी है। वनधन योजना की शुरू कर आदिवासी विकासखंडों में लघु वनोपजों के प्रसंस्करण केंद्रों की शुरूआत की। इसका फायदा ये हुआ कि घरों में रहने वाली आदिवासी महिलाओं को संबल मिला और वो घरों से निकलकर उद्यमी के रूप में खुद को स्थापित करने लगीं। भूमिगादी संगठन ने पूरे देश में महिला स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का बड़ा उदाहरण रच दिया है।