- संपूर्ण छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परम्परा की एक छत के नीचे मिलेगी झलक
द सीजी न्यूज
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में 3 सितंबर को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़ी आर्ट गैलरी का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के इस भव्य और शानदार आर्ट गैलरी में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों को प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। विश्वविद्यालय के चित्रकला, मूर्तिकला, ग्राफिक्स, क्राफ्ट एंड डिजाइन और लोक संगीत व कला संकाय के छात्र-छात्राओं ने उत्कृष्ट कलाकृतियां तैयार की हैं। आर्ट गैलरी के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने यहां उत्कृष्ट कलाकृतियों का अवलोकन किया ।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोनाबाई रजवार कला वीथिका के लोकार्पण के बाद यहां प्रदर्शित कलाकृतियां देखी। मुख्यमंत्री ने कला वीथिका में छत्तीसगढ़ की संस्कृति के प्रदर्शन पर विशेष रूप से खुशी जताई। उन्होंने कहा कि कला वीथिका में छत्तीसगढ़ की सुंदर परंपरा दिखाई गई हैं। छत्तीसगढ़ कला के क्षेत्र में बेहद समृद्ध रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप लोगों ने यहां ग्राफिक डिजाइन विभाग में छत्तीसगढ़ी परिधानों और ज्वैलरी को जिस तरह से प्रस्तुत किया है वह बहुत अच्छा है, इसमें आगे काफी गुंजाइश है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप इस आर्ट गैलरी को सरगुजा जिले की विश्वप्रसिद्ध लोकचित्र कलाकार स्व. सोनाबाई रजवार को समर्पित किया गया है। आर्ट गैलरी का नाम उन्हीं के नाम सोना बाई रजवार आर्ट गैलरी रखा गया है। इस कला प्रदर्शनी को डॉ. योगेन्द्र चौबे (अधिष्ठाता, लोक संगीत एवं कला संकाय), व्यंकट गुडे, डॉ रवि नारायण गुप्ता, डॉ विकास चंद्रा, डॉ छगेन्द्र उसेंडी, संदीप किंडो के देखरेख और मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। आर्ट गैलरी की खास बात यह है कि एक अवलोकन में ही संपूर्ण छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परम्परा को देखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री विशेष रुप से बस्तर की कलाकार छात्रा मुस्कान पारख से प्रभावित हुए। मुस्कान ने चटाई में घोटुल का चित्र बनाया था। मुख्यमंत्री को इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति मोक्षदा चंद्राकर ने बताया कि यह कलाकृति बस्तर में बस्तर में घोटुल की परंपरा से प्रेरित है और इसमें एक छोटे से चित्र के माध्यम से बस्तर की सुंदर और समृद्ध लोक जीवन को दिखाया गया है। मुस्कान ने चटाई में आदिवासी लोक कला का प्रदर्शन किया है और घोटुल को दिखाया है। चित्र में दिखाया गया है कि बस्तर में घोटुल में अपने प्रियजनों को डिज़ाइनर कंघी देने की परंपरा थी। जितनी सुंदर कंघी होगी, प्रियजन को यह उपहार इतना ही पसंद आएगा।
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