द सीजी न्यूज
पानी का प्रेशर कम … नाली और नाले से होकर गुजर रही है पाइपलाइन … ऐसी ही पाइपलाइन को पंचर कर लोग पानी का जुगाड़ करने पर मजबूर हैं … नतीजा ये है कि पंचर करने से नाली या नाले का गंदा पानी पाइपलाइन के अंदर भर जाता है। इसी गंदे पानी का सेवन करने से लोग डायरिया जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
ये तस्वीरें उस भिलाई की है जहां पिछले 10 साल में पेयजल योजनाओं पर करीब 350 करोड़ रुपए खर्च किये जा चुके हैं। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद अगर पानी का प्रेशर कम है और पाइपलाइन गंदी नालियों या नाले से होकर गुजर रहा है तो इस भयावह स्थिति के लिए पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी से ज्यादा कुसूरवार नगर निगम के तत्कालीन अफसर हैं, जिन पर इन कार्यों को कराने की जिम्मेदारी थी। उस समय जिम्मेदार पदों पर बैठे जनप्रतिनिधि भी उतने ही कुसूरवार हैं, जिन्होंने अरबों रुपए के कार्य कराने का श्रेय तो लिया लेकिन भिलाई की जनता के लिए जिम्मेदारी से काम नहीं किया।
बड़ा सवाल ये है कि साढ़े तीन अरब की राशि में किसने कितना अंदर किया ???
उससे भी बड़ा सवाल ये है कि गंदे पानी के सेवन से डायरिया-पीलिया जैसी बीमारी से होने वाली मौतों के बाद क्या किसी की जिम्मेदारी तय की जाएगी ??? किसे माना जाएगा जिम्मेदार ???
अहम बात ये भी है कि यह स्थिति दोबारा न होने देने के लिए क्या नगर निगम के पास कोई एक्शन प्लान है ???
अगर नहीं तो क्या ऐसे ही संक्रामक बीमारियां फैलती रहेगी और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ होता रहेगा ? कब तक लोगों की जान ऐसे ही जाती रहेगी ???
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