- खुलासे के बाद राजनीति में भूचाल
द सीजी न्यूज
जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के ताजा इंटरव्यू ने पूरे देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक वेब पोर्टल को दिये गए साक्षात्कार में मलिक ने कहा, ‘मैं सेफली (सुरक्षित रूप से) कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से बहुत नफरत नहीं हैं।’ फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले को लेकर मलिक ने कई खुलासे किये।
मलिक ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने पुलवामा हमले को लेकर हुई सभी चूकों को सीधे मोदी के समक्ष उठाया। मोदी ने उन्हें पुलवामा हमले के तुरंत बाद कॉर्बेट पार्क के बाहर से बुलाया था। प्रधानमंत्री ने उनसे इस बारे में चुप रहने और किसी को न बताने को कहा था। एनएसए चीफ अजीत डोभाल ने भी उन्हें चुप रहने और इस बारे में बात न करने के लिए कहा था। मलिक ने कहा कि उन्हें फौरन एहसास हुआ कि यहां इरादा पाकिस्तान पर दोष मढ़ना और सरकार और भाजपा के लिए चुनावी फायदा पाना था।
मलिक ने कहा कि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला भारतीय सिस्टम, विशेष रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और गृह मंत्रालय की ‘अक्षमता’ और ‘लापरवाही’ का नतीजा था। उस समय राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे। सीआरपीएफ ने अपने जवानों को ले जाने के लिए विमान की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इनकार कर दिया। रास्ते में प्रभावी ढंग से सुरक्षा इंतजाम नहीं किया गया था। पुलवामा की घटना में गंभीर खुफिया चूक भी हुई थी, क्योंकि 300 किलोग्राम आरडीएक्स ले जाने वाली कार पाकिस्तान से आई थी, लेकिन बिना किसी की नजर में आए या जानकारी के 10-15 दिनों तक जम्मू कश्मीर की सड़कों और गांवों में घूमती रही।
मलिक ने आगे बताया कि जब वे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे, तो भाजपा-आरएसएस नेता राम माधव ने एक पनबिजली योजना और एक रिलायंस बीमा योजना को मंजूरी देने के लिए उनसे संपर्क किया था। उन्होंने यह कहते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया था कि ‘मैं गलत काम नहीं करूंगा।’ माधव एक सुबह सात बजे उनसे मिलने पहुंचे थे ताकि उनका मन बदल सके। मलिक ने कहा कि उस समय लोग उनसे कह रहे थे कि दोनों योजनाओं को मंजूरी देने के लिए उन्हें 300 करोड़ रुपये मिल सकते थे।
मलिक ने इंटरव्यू में कहा पीएम और उनके कई मंत्रियों द्वारा मुस्लिमों के साथ किए जा रहे बर्ताव की तीखी आलोचना की। उनका यह भी कहना था कि अडानी समूह से संबंधित आरोपों के कारण प्रधानमंत्री को गंभीर नुकसान हुआ है और यह बात गांवों तक पहुंच चुकी है, जिससे आगामी आम चुनावों में भाजपा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर अगर विपक्ष भाजपा के खिलाफ एक भी उम्मीदवार खड़ा कर दे।
मलिक ने कहा कि राहुल गांधी को संसद में बोलने की अनुमति न देना एक अभूतपूर्व गलती थी। राहुल गांधी ने अडानी घोटाले पर सही सवाल उठाया, जिसका स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री जवाब नहीं दे सके। मलिक ने सरकार पर ‘थर्ड क्लास’ लोगों को राज्यपाल नियुक्त करने का आरोप भी लगाया। मलिक ने कहा कि प्रधानमंत्री के बारे में अपने कहे हर शब्द के साथ खड़े हैं और इसका क्या नतीजा होगा, उसकी परवाह नहीं करते। उन्होंने कहा कि उन्हें जितनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, उससे कम सुरक्षा दी गई है – मगर उन्हें इसकी भी चिंता नहीं है।
मलिक ने कहा कि जम्मू कश्मीर से पूर्ण राज्य का दर्जा वापस लेना गलती थी और इसे जल्द से जल्द सुधारा जाना चाहिए। ‘प्रधानमंत्री अपने में मस्त हैं।’ प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार की जरा भी चिंता नहीं है। उन्हें अगस्त 2020 में गोवा के राज्यपाल के पद से हटा दिया गया और मेघालय भेजा गया था, क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार के कई मामलों को प्रधानमंत्री के ध्यान में लाया था, जिसे सरकार ने निपटने के बजाय अनदेखा कर दिया। प्रधानमंत्री के आसपास के लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और अक्सर पीएमओ के नाम का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने यह सब मोदी को बताया था, लेकिन उन्हें इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं सुरक्षित रूप से कह सकता हूं प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार से बहुत नफरत नहीं है।’
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