- सांसदों से केंद्र से मानदेय की लंबित राशि दिलाने का आग्रह किया
द सीजी न्यूज
रायपुर / छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड से पंजीकृत मदरसों के शिक्षक-शिक्षिकाओं को साढ़े चार वर्षों से मानदेय नहीं मिला है। मदरसा शिक्षा गुणवत्तापरक योजना के अंतर्गत प्रदेश के पंजीकृत मदरसों को शिक्षक मानदेय न मिलने से शिक्षकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष अलताफ अहमद ने इस मामले को लेकर राज्य के सभी सांसदों को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से लंबित मानदेय की राशि दिलाने अनुरोध किया है।
अलताफ अहमद ने बताया कि प्रदेश के सभी राज्यसभा सांसदों और लोकसभा सांसदों को पत्र लिख कर इस समस्या से अवगत कराते हुए मदरसा शिक्षकों के मानदेय की लंबित राशि केन्द्र सरकार से दिलाने अनुरोध किया गया है। भारत सरकार द्वारा संचालित मदरसों को शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना एसपीईएमएम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ प्रदेश के शिक्षकों को 2017-18 से 2022-23 तक मानदेय की राशि भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय व अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में लंबित हैं। भारत सरकार द्वारा वर्तमान सत्र के अनुदान का प्रस्ताव भी अभी तक नहीं मंगाया गया है।
अलताफ अहमद ने कहा है कि केन्द्र प्रवर्तित योजना एसपीईएमएम के तहत मदरसा शिक्षकों के मानदेय की 60 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती है। साढ़े चार साल से केन्द्र सरकार ने 60 प्रतिशत राशि जारी नहीं की है। इस कारण राज्य सरकार भी 40 प्रतिशत राशि जारी नहीं कर पा रही है। राज्य सरकार मानदेय की राशि देना चाहती है, लेकिन नियमानुसार जब तक केन्द्र सरकार से 60 प्रतिशत राशि जारी नहीं होगी, तब तक राज्य सरकार भी अपने हिस्से की 40 प्रतिशत राशि जारी नहीं कर सकती।
अलताफ ने कहा है कि वे शीघ्र इस समस्या के निराकरण के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर निवेदन करेंगे। कोरोना काल में मदरसा शिक्षकों को राहत देते हुए राज्य शासन द्वारा एक माह का मानदेय प्रदान किया गया था। केंद्र सरकार से लंबित मानदेय की राशि दिलाने वे शीघ्र ही दिल्ली जाकर संबंधित मंत्री व अधिकारियों से चर्चा करेंगे।
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