द सीजी न्यूज
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग संभाग के युवाओं के साथ भेंट-मुलाकात के लिए जयंती स्टेडियम, सेक्टर-6, भिलाई में कार्यक्रम स्थल पर आज “कका … कका” के नारे गूंजते रहे। धुमाल और बैंड परफॉर्मेंस की धुन में उत्साहित युवा सीएम से भेंट मुलाकात कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले खुशी से झूमते रहे। मुख्यमंत्री के आगमन के साथ ही युवाओं का जोश दोगुना हो गया है। छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर राज्य गीत के साथ मुख्यमंत्री ने युवाओं से भेंट–मुलाकात कार्यक्रम की शुरूआत की।
युवाओं के साथ भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राजनांदगांव, कवर्धा, बालोद, बेमेतरा, खैरागढ़, मानपुर-मोहला-अंबागढ़-चौकी और दुर्ग जिले से आए युवाओं से जयंती स्टेडियम, भिलाई में सीधी बातचीत की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि पिछले साल 4 मई से हमने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की शुरुआत की। शहर और गांव क्षेत्र में सभी वर्गों के लोगों से मुलाकात की। उस समय से ही मन में था कि युवाओं के साथ भेंट-मुलाकात करना है। इस क्रम में पहले रायपुर फिर बिलासपुर में भेंट-मुलाकात किए और आज दुर्ग संभाग में भेंट-मुलाकात कर रहे हैं।
कका अभी जिंदा है कहते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने संबोधन की शुरूआत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ युवाओं ने अपनी आकांक्षा बताई। उनका जो सपना है। वही हमारे पुरखों का भी सपना था। सरकार का भी यही सपना है। लोगों के बैंक खाते में पौने 2 लाख करोड़ रुपये डालने का काम हमारी सरकार ने किया। इससे मंदी नहीं आई। यूनिवर्सिटी खोले, 4 मेडिकल कॉलेज खोले।
जहां -जहां भेंट मुलाकात के लिए गए, दो मांग आती है – स्वामी आत्मानंद स्कूल खोलने और बैंक खोलने की मांग। इतने साल हो गए इंग्लिश माध्यम के कॉलेज नहीं थे। हमने 10 कॉलेज खोले। आगे भी खोलेंगे।
सीएम ने कहा कि अब छत्तीसगढ़ की पहचान हमारी विशिष्ट संस्कृति से है। चाहे आदिवासी परम्परा हो, राम वन पथ गमन हो, कबीर सरोवर हो या बाबा घासीदास के पुण्यस्थलों से जुड़े स्थलों का विकास। 1 मई को जब हम बोरे बासी खाये तो सभी ने बासी भात खाया। अब शिक्षा और संस्कृति से सम्पन्न भविष्य नई पीढ़ी का होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले केवल 2 आवासीय खेल अकादमी थी। अब 8 अकादमी हो गए हैं। खेल को बढ़ावा देने हम विशेष प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए नियत समय के लिए स्कूलों हेतु कोच से एग्रीमेंट कर सकते हैं। हमारे खिलाड़ियों ने 13 पदक जीते हैं। आप बस्तर, राजनांदगांव, बिलासपुर के स्टेडियम देखिए। भिलाई में तो खेल के प्रति रुझान है। ऐसे खेलों का भी आयोजन हो रहा है जिनका नाम भी नहीं सुना। अबूझमाड़ के खिलाड़ियों ने मल्लखंभ में देश भर में नाम कमाया है।
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