- भिलाई और वैशाली नगर सीट पर कांग्रेस की राह आसान नहीं
द सीजी न्यूज
विधानसभा चुनाव के लिए अधिकांश सीटों पर दोनों दलों के प्रत्याशी तय होने के बाद अब राजनीतिक बिसात पर शह और मात का खेल शुरू हो गया है। कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने सियासी दांवपेंच शुरू कर दिये हैं। नाराज कार्यकर्ताओं की मानमनौव्वल से लेकर संगठन के प्रमुख कर्ताधर्ताओं और संगठन पदाधिकारियों के साथ जंग जीतने के लिए मंथन का दौर भी तेज हो गया है।
टिकट वितरण में भाजपा आगे रही और इसलिए चुनावी जंग की तैयारियां भी भाजपा ने पहले से शुरू कर दी। लेकिन, यह कहना पूरी तरह गलत होगा कि कांग्रेस की तैयारियां शुरू ही नहीं हुई। सच ये है कि अधिकांश कांग्रेस प्रत्याशियों को टिकट मिलने के स्पष्ट संकेत पहले ही मिल चुके थे। लिहाजा, टिकट मिलने से पहले ही कांग्रेस प्रत्याशियों ने ग्राउंड वर्क शुरू कर दिया। अब टिकट फाइनल होने के बाद उनकी तैयारियों में तेजी आ गई है।
प्रारंभिक संकेतों के अनुसार दुर्ग जिले में पाटन, दुर्ग ग्रामीण और अहिवारा सीट पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। पाटन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सामने सांसद विजय बघेल चुनाव लड़ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यहां भूपेश की एकतरफा लहर चल रही है। पाटन के गांव-गांव में मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की फौज इतनी ज्यादा है कि सीएम भूपेश बघेल के प्रमुख सिपहसालार उन्हें संभाल नहीं पा रहे हैं। पाटन क्षेत्र में कराए गए बेहिसाब विकास कार्यों के कारण पाटन क्षेत्र की जनता अपने भूपेश कका पर मोहब्बत बरसाने में कोई कोर कसर नहीं छो़ड़ना चाहती। यहां कांग्रेस जीत के लिए नहीं बल्कि, ऐतिहासिक विजय के लिए चुनाव लड़ रही है।
दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के सामने भाजपा नेता ललित चंद्राकर चुनाव मैदान में हैं। ताम्रध्वज साहू का अनुभव, चुनाव प्रबंधन और क्षेत्र में लगातार सक्रियता से विकास कार्य कराने के साथ ही दुर्ग ग्रामीण एरिया के मतदाताओं से जीवंत संपर्क रखने की ताकत के आगे ललित चंद्राकर के चुनावी तेवर फीके लग रहे हैं। ललित पिछले दो दशक से टिकट की मांग करते रहे हैं और इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की जनता से जीवंत संपर्क रखा। क्षेत्र के मतदाताओं का कहना है कि ललित की सक्रियता के बावजूद चुनावी मुकाबले में ताम्रध्वज साहू काफी ताकतवर साबित होंगे। शुरुआती दौर में ही ललित का प्रबंधन पिछड़ने लगा है।
दुर्ग शहर में कांग्रेस विधायक अरुण वोरा की सक्रियता और सरलता उनकी ताकत है। लेकिन, बीते पांच साल के कार्यकाल के दौरान उनकी वर्किंग स्टाईल में कई खामियां उनके माइनस पाइंट हैं। पहली बार दुर्ग में वोरा को कांग्रेस खेमे से ही कई स्तरों पर चुनौती मिल रही है, जो उनकी मुसीबत बढ़ाने का काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, गजेंद्र यादव को आरएसएस ने टिकट दिलाई है। लिहाजा भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र यादव को इलेक्शन मैनेजमेंट में एक्स्ट्रा पॉवर भी मिलना तय माना जा रहा है। कुल जमा निचोड़ यह है कि यहां वोरा की स्थिति मजबूत होने के बावजूद मुकाबला कांटे का होने की संभावना है।
भिलाई नगर में विधायक देवेंद्र यादव ने पिछला चुनाव 2849 वोटों से जीता था। पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के साथ इस बार भी उनका मुकाबला होगा। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अनुभवी पीपीपी ने पिछले चुनाव में मिली हार से सबक सीखकर बीते पांच साल में खामियों का गड्ढा पाटने में पूरी ताकत झोंकी है। पांडेय प्रदेश भाजपा के खांटी नेताओं में गिने जाते हैं। हार को जीत में बदलना जानते हैं। वहीं सक्रियता के साथ विकास कार्यों का नया आयाम गढ़ने के बावजूद ईडी के छापे से देवेंद्र यादव की छवि पर बट्टा लगा है। देवेंद्र समर्थकों के रंग बिरंगे यानी काले-पीले कारनामे भी भिलाई की फिजाओं में गूंजते रहे हैं। इन कारणों से देवेंद्र की टिकट को लेकर शुरू से संशय की स्थिति रही। देवेंद्र को टिकट मिलने के बाद अब प्रेमप्रकाश पांडेय पूरे लाव लश्कर के साथ देवेंद्र को घेरने में कोरकसर नहीं छोड़ेंगे। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषकों ने अभी से भिलाई की सीट पर ट्रपल पी लिख दिया है।
वैशाली नगर क्षेत्र में भाजपा से रिकेश सेन चुनाव लड़ रहे हैं जबकि कांग्रेस के भिलाई नगर अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर चुनाव मैदान में हैं। यह क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है, लेकिन निगम चुनाव में कांग्रेस को यहां से काफी सीटें मिलने से पार्टी की उम्मीद बढ़ गई है। चुनाव प्रबंधन और आम जनता के बीच लोकप्रियता के मामले में रिकेश की कद काठी ज्यादा मजबूत लग रही है। हालांकि विरोधियों के आरोप और वायरल हो रही वीडियो उनकी साख पर बट्टा लगा रही है। दूसरी ओर मुकेश चंद्राकर ने पांच साल पहले ही राजनीतिक डगर पर कदम रखा है। उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत होने और सीएम भूपेश बघेल से करीबी संबंधों के कारण उन्हें टिकट मिल गई। मुकेश को टिकट मिलने से वैशाली नगर के कई नए-पुराने कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक सेहत पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे तमाम नेता मुकेश की राह में कांटे बिछाएंगे या नहीं? इस सवाल के जवाब से ही चुनाव के नतीजे तय होने की संभावना जताई जा रही है।
अहिवारा क्षेत्र में कांग्रेस ने भिलाई चरौदा के महापौर निर्मल कोसरे को प्रत्याशी बनाया है। उनके सामने भाजपा से पूर्व विधायक डोमन लाल कोर्सेवाड़ा चुनाव मैदान में है। डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के अनुभव और क्षेत्र में काफी अच्छी पैठ होने के बावजूद निर्मल कोसरे शुरुआती चुनावी जंग में आगे दिख रहे हैं। पार्टी नेताओं से हरी झंडी मिलने के बाद निर्मल कोसरे ने एक माह पहले से ही चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थी। महापौर के रूप में भिलाई चरौदा क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने और विकास कार्य कराने के साथ साथ निर्मल छवि के कारण उनकी स्थिति काफी मजबूत बताई जा रही है।
कुल मिलाकर राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दुर्ग जिले की तीन सीटों पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत है। चुनावी युद्ध के आगाज के दौर में ही पाटन, दुर्ग ग्रामीण और अहिवारा सीट पर अपनी मजबूत स्थिति के कारण कांग्रेस अभी से जश्न मनाने की स्थिति में है। दुर्ग शहर में कड़ी टक्कर की स्थिति है हालांकि, अरुण वोरा की स्थिति बेहतर है। भिलाई की राजनीतिक तासीर को समझने वालों का कहना है कि भिलाई नगर और वैशाली नगर सीट भाजपा के लिए खुशियों की सौगात ला सकते हैं।
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