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ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा आजादी के आंदोलन में काकोरी काण्ड के महान क्रांतिकारियों शहीद राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह और राजेंद्र लाहड़ी की शहादत दिवस आज पूरे सम्मान के साथ कैलाश नगर दुर्ग में मनाई गई। आजादी के आंदोलन के महान क्रांतिकारियों के जीवन संघर्षों को याद करते हुए सभा में भिलाई स्टील प्लांट के पूर्व एजीएम ए के मैत्रा व युवा संगठन के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विश्वजीत हारोड़े ने कहा कि महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ व रोशन सिंह 19 दिसंबर 1927 और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी 17 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई।
देश के प्रति गहरी निष्ठा, जनता से बेहद प्यार, सही मायने में हर तरह की आजादी के लिए मर मिटने की भावना से ओत-प्रोत, वीरता व जवानी से भरपूर इन क्रांतिकारियों का संघर्ष समझौता रहित था। जात-पांत, इलाका परस्ती को इन्होंने नजदीक नहीं फटकने दिया। धर्म को क्रान्ति के रास्ते का रोड़ा नहीं बनने दिया। वे क्रांति पथ के राही थे, एक लक्ष्य, एक उद्देश्य लेकर सिर पर कफन बाँध कर आगे बढ़े। रामप्रसाद बिस्मिल व अशफाकउल्ला खां की सोच में एकरूपता थी। अपनी आत्मकथा में बिस्मिल ने लिखा, ‘अंग्रेज चाहते हैं कि हिंदू-मुस्लिम झगड़ों का फायदा उठाओ और भारतवर्ष की गुलामी की जंजीरें और कस दो।’ अशफाक ने कहा, ‘मुल्क का सवाल मजहबी भेदभाव से कहीं ऊंची चीज है, मेरा दिल खुला हुआ है, एक मुसलमान के लिए भी वैसा ही जैसा कि एक हिन्दू के लिए।
स्वाधीनता संग्राम में लगे इन क्रांतिकारियों के पास संसाधनों का बहुत अभाव था। इसलिए उन्हें सरकारी धन लूटने की योजना बनाई। 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के काकोरी स्टेशन के नजदीक एक रेलगाड़ी से सरकारी खजाना लूटने के केस में चारों क्रान्तिकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई। आज हुई सभा का समापन क्रांतिकारी नारों के साथ हुआ। सभा को राज्य संगठन सचिव आत्मारामसाहू ने भी सम्बोधित किया। सभा का संचालन दुर्ग ज़िला अध्यक्ष देवेन्द्र पाटिल द्वारा किया गया।
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