द सीजी न्यूज
भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी देवेंद्र यादव इन दिनों विश्वास यात्रा निकाल रहे हैं। संदेश दे रहे हैं कि मनी लांड्रिंग केस में उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने के बावजूद पब्लिक का भरोसा कायम है, विश्वास बरकरार है। अरबों रुपए के घोटाले में शामिल रहे नेता महिला मतदाताओं को माथे पर लगने वाली बिंदिया, चूड़ियां, मेंहदी के साथ सोनपापड़ी जैसी सस्ती मिठाई का डिब्बा उपहार में देकर दिल जीतने में सफल रहते हैं।
बड़ा सवाल ये है कि देवेंद्र यादव को विश्वास यात्रा निकालने की जरूरत क्यों पड़ रही है ?
दरअसल, विधायक देवेंद्र यादव के विरुद्ध चुनाव लड़ने वाले प्रेमप्रकाश पांडेय चार बार भिलाई से विधायक रह चुके हैं। यानी 20 साल के विधायक कार्यकाल के बावजूद पांडेय के दामन पर कोई दाग-धब्बा नहीं लगा है। देवेंद्र यादव ने 2018 में पहली बार चुनाव जीता और पांच साल के कार्यकाल में ही कई मामलों में उनका नाम आ चुका है।
सभी को पता है कि देश भर में चर्चित मनी लॉड्रिंग केस में भी देवेंद्र यादव का नाम शामिल है। ईडी ने बाकायदा उनके निवास पर छापेमार कार्रवाई भी की। इस केस में विधायक देवेन्द्र यादव सहित अन्य लोगों को ईडी द्वारा नोटिस जारी किया गया है। देवेंद्र पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है।
ईडी ने 7000 पन्नों का परिवाद पेश किया था। जिसमें 282 पेज की समरी और 5500 पन्नों का अभिलेख शामिल है। इसमें बताया गया था कि सिंडीकेट बनाकर किस तरह से मनी लॉड्रिंग की गई। इसमें सभी की भूमिका का उल्लेख किया गया है। प्रकरण में निलंबित आईएएस अफसर समीर विश्नोई सहित राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन अधिकारी और आधा दर्जन अन्य को जेल भेजा जा चुका है। सभी के खिलाफ पहले ही 12500 पेज का चालान पेश किया जा चुका है।
देवेंद्र यादव के समर्थकों द्वारा अवैध शराब की तस्करी करने, ऑनलाइन सट्टा जैसे अपराधों में भी शामिल होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
अब भिलाई की जनता के सामने मुद्दा ये है कि आर्थिक अपराधों के अलावा जुआं सट्टा, अवैध शराब बेचने जैसे मामलों को बढ़ावा देने वाले जनप्रतिनिधि को चुनेंगे या 20 साल तक बेदाग रहने वाले जनप्रतिनिधि को …
दावा किया जा रहा है कि तीज त्यौहार के अवसर पर चूड़ी, मेंहदी और बिंदिया के साथ मिठाई का डब्बा मिलने से काफी लोग खुश हैं। करोड़ों अरबों के स्कैम में फंसने के बावजूद सौ पचास रुपए का गिफ्ट देकर जनप्रतिनिधि अपने मतदाताओं को खुश कर लेते हैं और वोट पाने के बाद फिर से नए नए घोटाले करने लगते हैं। ये भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्य है।
इस बार करोड़ों का स्कैम करने वाले जनप्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद अरबों का घोटाला करेंगे, यह तय है
चुनाव में सबसे बड़ा रुपइया का गेम कब तक चलता रहेगा ?
यह मतदाताओं को तय करना है।
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