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राजनीति के संत थे “बाबूजी”

द सीजी न्यूज

दुर्ग। अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मोतीलाल वोरा सही मायनों में राजनीति के अनमोल मोती थे, विनम्र संत थे। युवावस्था में क्षेत्रीय स्तर पर पत्रकारिता में सक्रिय रहे मोतीलाल वोरा सबसे पहले दुर्ग नगर पालिका के पार्षद चुने गए। इसके बाद दुर्ग शहर के विधायक के रूप में शहरवासियों की सेवा की। धीरे-धीरे राजनीति के ऊंचे मुकाम हासिल करते रहे मोतीलाल वोरा ने देश की राजनीति के शिखर को व सिर्फ स्पर्श किया, बल्कि शीर्ष राजनीति के आसमांन पर वर्षों तक छाए रहे।

मोतीलाल वोरा की राजनीति का अंदाज जुदा था। दुर्ग से लेकर भोपाल, लखनऊ और देश की राजधानी दिल्ली तक सभी लोग उन्हें बाबूजी कहते थे। बाबूजी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सहजता और विनम्रता के साथ सरल स्वभाव रही। करीब 55 साल के राजनीतिक जीवन में बाबूजी की ताकत लगातार बढ़ती गई। इसमें कभी कमी नहीं आई।

वे दुर्ग नगर पालिका से लेकर भोपाल के वल्लभ भवन, लखनऊ के राजभवन और दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय और संसद भवन तक अपनी सादगी और सरलता की खुशबू बिखेरते रहे। इसी सादगी और सरलता के कारण वोरा को राजनीति का संत भी कहा जाता है।

एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शब्दों में “ वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा समूचे जीवन में एक शानदार शख्सियत रहे। उनके जैसा व्यक्ति मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा। यह उनके विशाल व्यक्तित्व का हिस्सा था कि वे जिससे भी मिलते थे, इतनी आत्मीयता से मिलते थे कि एक रिश्ता सा बना लेते थे। बड़े-बड़े पदों पर रहने के बाद भी उन्हें जरा सा भी घमंड नहीं था। हरेक नेता, कार्यकर्ता और आम जनता से सहृदयता के साथ मिलते थे। किसी को आभास तक नहीं होता था कि वे खुद कितने बड़े कद में हैं और दूसरों को एहसास भी नहीं होने देते थे। दिग्विजय आगे कहते हैं – बाबूजी अविभाजित मध्यप्रदेश के विकास के शिल्पकार रहे।

बड़े-बड़े पदों पर रहते हुए भी बाबूजी ने कभी भी अहंकार का भाव नहीं रहा। बाबूजी ने अपने जीवनकाल में लोगों को यह एहसास ही नहीं होने दिया कि वे कितनी बड़ी राजनीतिक हस्ती हैं। दुर्ग हो या भोपाल या फिर लखनऊ और दिल्ली, हर जगह बाबूजी पीएम, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, सांसदों व अन्य दिग्गज राजनेताओं से उसी सरल अंदाज में बातें करते, जितनी सरलता से किसी आम आदमी से बातचीत करते थे।  

बाबूजी ने अपने सारे राजनीतिक मुकाम सिर्फ और केवल मेहनत और निष्ठा से हासिल किये। अविभाजित मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए बाबूजी रोज करीब 18 घंटे काम करते थे। आपकी सरकार आपके द्वार योजना के माध्यम से बाबूजी ने अविभाजित मध्यप्रदेश के एक-एक जिले और कस्बे में सरकारी तंत्र को दस्तक देने का अभियान चलाया।

यूपी में राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालते हुए वोरा रोज घंटो तक मेहनत करते। यूपी के लोग उनकी कार्यशैली और सहजता के कायल रहे। आज भी उत्तरप्रदेश के लोग बाबूजी की सरलता को याद करते हैं। बाबूजी के काम करने की कार्यशैली के कारण उत्तर प्रदेश के लोग आज भी उनकी सराहना करते हैं।

बाबूजी देश दुनिया की खबरों से वाकिफ रहते। समाज के प्रति उनका चिंतन व्यापक था। सरल और विनम्र व्यवहार के साथ पूरी सहजता, सरलता से वे देश दुनिया की समस्याओं को लेकर विस्तृत ब्यौरा दे देते। उनकी जनसेवा का भाव अविष्मरणीय रहा।

… बाबूजी की वो आखिरी पोस्ट

बाबूजी ने मार्च के महीने में सोशल मीडिया पर आखिरी पोस्ट लिखा …  राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने बेहद भावुकता भरी पोस्ट लिखी … इस पोस्ट में उन्होंने खुद को कार्यकर्ता बताते हुए एमपी, छत्तीसगढ़ और विशेषकर दुर्ग की जनता को प्रणाम भी किया।

बाबूजी ने लिखा – सदन के अंतिम दिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, व विशेष तौर पर दुर्ग की जनता को मैं प्रणाम करता हूँ। मेरे लिए यह गर्व की बात है, इंदिरा जी के साथ शुरुवात कर राहुल जी के साथ देने तक अपना सर्वस्व कांग्रेस को मजबूत करने में लगाया, पार्षद से लेकर मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व राज्यपाल के रूप में मैंने सेवाएं दीं। आगे भी राहुल जी को विश्वास दिलाना चाहता हूं। यह कार्यकर्ता आपके लिए सदैव तत्पर है.. पक्ष एवं विपक्ष के सभी नेताओं का सहयोग के लिए आभार…

आपका
मोतीलाल वोरा

ऐसे थे बाबूजी … राजनीति के अनमोल मोती … बेहद विनम्र … महान कर्मयोगी … राजनीति के संत …

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