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स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने आज शिक्षण स्तर का जमीनी स्तर पर परीक्षण करने के लिए तीन जिलों में पूर्व सूचना देने के बाद स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों से पुस्तकें पढ़ने कहा गया। गणित के सवाल देकर बच्चों का शैक्षिक स्तर जानने का प्रयास किया। कुछ स्कूलों में बच्चों ने ठीक से पुस्तक पढ़ ली, वहीं कुछ स्कूलों में बच्चे अटक-अटक कर पढ़ते रहे। उन्हें पाठ की समझ भी नहीं थी। गणित में भी बच्चे कमजोर मिले।
डॉ आलोक शुक्ला ने जिले के सभी जमीनी स्तर के अधिकारियों को शिक्षण व्यवस्था में सुधार लाने फटकार लगाते हुए सभी को एक माह का समय दिया है। अपने-अपने जिले के सभी निरीक्षण अधिकारियों को अधीनस्थ शालाओं का निरीक्षण करते हुए केवल बच्चों के पठन, लेखन और गणितीय कौशल के विकास की ओर ध्यान देने पर फोकस करने कहा गया है। एक माह के बाद स्कूलों में बच्चे अगर अटक-अटक कर पढ़ते पाए गए और सरल गणित के सवालों को हल नहीं कर पाए तो अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
बिलासपुर जिले में प्रमुख सचिव द्वारा अंगना म शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत मेले का अवलोकन भी किया। मेले में विभिन्न काउंटर में माताओं द्वारा अपने बच्चों के साथ अलग-अलग गतिविधियां करते हुए घर पर रहकर सीखने के तरीकों का अनुभव ले रही थी। इस अवसर पर मेले में सबसे सक्रिय माता को स्मार्ट माता के रूप में सम्मानित किया। बिलासपुर में यह सम्मान आराधना तान्दिया को मिला।
बता दें कि सौ दिवसीय गणितीय और पठन कौशल अभियान व ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से बहुत से कार्य फील्ड में किये जाने हैं। शालाओं में अकादमिक निरीक्षण के लिए भी कार्यक्रम तैयार कर आनलाइन प्रविष्टि हेतु अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित किया जा चुका है। आज इसी के तहत निरीक्षण किया गया। इस दौरान प्रमुख सचिव के साथ समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक नरेंद्र दुग्गा, संयुक्त संचालक बिलासपुर से हीराधर, जिला शिक्षा अधिकारी एएन बंजारा, सतीश पांडे व डी.के. कौशिक उपस्थित रहे।
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