- यूपीएससी टॉपर्स ने दिए आईएएस बनने के टिप्स : सोशल मीडिया से दूर रहने से मिला बड़ा फायदा
- यूपीएससी में चयन के लिए जगह, भाषा बाधक नहीं
- बीआईटी दुर्ग में जुटे पांच यूपीएससी टापर ने अपने अनुभव किये साझा
- कलेक्टर साहब … इस शानदार पहल के लिए आपको साधुवाद …
द सीजी न्यूज
दुर्ग / यूपीएससी में चयन के लिए किसी बड़ी सिटी में रहना जरूरी नहीं। रायपुर से पढ़कर भी सलेक्शन हो सकता है। कोचिंग की सुविधा के बिना भी सलेक्शन हो सकता है। हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने पर भी सलेक्शन हो सकता है। जरूरी नहीं कि सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं से आपने पढ़ाई की हो।
ये बातें कही, भारत की सबसे कठिन परीक्षा माने जाने वाले यूपीएससी में सफलता के झंडे गाड़ने वाले छत्तीसगढ़ के पांच यूपीएससी टॉपर्स का। आज बीआईटी के सभागार में ये पांच टॉपर्स जुटे और आईएएस बनने का सपना देखने वाले स्टूडेंट्स के बीच कामयाबी पाने के टिप्स शेयर किये। सभी के एजुकेशन फील्ड अलग-अलग थे। सभी ने एक कॉमन फार्मूला दिया – पसंद का सबजेक्ट चुनो और खूब पढ़ो।
छत्तीसगढ़ की टॉपर श्रद्धा शुक्ला ने कहा कि – वो रायपुर से हैं, उन्होंने कोचिंग नहीं ली और मौलिक मटेरियल पढ़ा। रायपुर से ही पढ़ाई भी की। पूजा ने बताया कि वो मगरलोड से हैं। घर में इंटरनेट का कवरेज ही नहीं है। इंटरनेट चाहिए तो छत के ऊपर जाना पड़ता है। फिर भी चयन में इसके लिए कोई बाधा नहीं आई। उन्हें लगा कि सोशल मीडिया तैयारी करने में सबसे बड़ी रुकावट है। पढ़ाई के लिए तीन साल तक सोशल मीडिया से दूर रही। शुरूआती दो प्रयास में सफलता नहीं मिली, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। निगेटिव लोगों से दूर रही। पॉजिटिविटी आपके अंदर है। इसके लिए मसूरी जाकर मोटिवेशन नहीं लेना पड़ता। ऐसा मोटिवेशन टिकता नहीं है।
अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि जॉब में थे, इसलिए टाईम मैनेज करना पड़ा। जॉब करते हुए भी पढ़ाई की जा सकती है। अक्षय पिल्लै ने कहा कि इंजीनियरिंग के सब्जेक्ट लेकर भी चयनित हुआ जा सकता है। कोई भी विषय हो, उसमें आपकी पकड़ मायने रखती है। दिव्यांजलि ने कहा कि यूपीएससी की तैयारी मैराथन दौड़ जैसी है। इसमें सही रणनीति रखना बहुत जरूरी है।
कलेक्टर ने साझा किये अपने अनुभव – कार्यशाला में कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि जिस तरह साढ़े तीन घंटे आप लोग लगातार धैेर्य से आज टॉपर्स को सुन रहे हैं। कुछ वर्षों पहले मैंने भी ऐसी ही एक कार्यशाला अटेंड की थी जिसमें खड़े हुए साढ़े तीन घंटे टापर्स को सुना था। जहां आपके इंटेलीजेंस की सीमा होती है वहां से हार्ड वर्क काम करना शुरू कर देता है।
एसपी ने बताए कामयाबी के मंत्र – एसपी डा. अभिषेक पल्लव ने कामयाबी का मंत्र बताते हुए कहा कि हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है। स्मार्ट वर्क की शुरूआत भी हार्ड वर्क से हुए अनुभवों से होती है। कोई यूपीएससी की तैयारी करें तो उसे पूरी तौर पर समर्पित होकर तैयारी करनी होगी। जब तक पूरे संकल्प से अपनी शक्ति इसमें झोंक नहीं देंगे, तब तक सफलता नहीं मिलेगी लेकिन सही रणनीति से यदि कड़ी मेहनत की जाए तो सफलता तय है।
प्रतिभागियों ने भी पूछे प्रश्न – इस दौरान प्रतिभागियों ने भी प्रश्न पूछे। कार्यशाला के अंत में अपर कलेक्टर पद्मिनी भोई ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज की कार्यशाला से निश्चित रूप से ही अभ्यर्थियों को मदद मिली होगी। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर जागेश्वर कौशल, लवकेश ध्रुव और उप संचालक जनशक्ति नियोजन राजकुमार कुर्रे भी मौजूद थे।
कलेक्टर की इस पहल को सलाम
कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने एक शानदार पहल करते हुए यूपीएससी में कामयाबी पाने वाले पांच टैलेंट को एक मंच पर बुलाकर न सिर्फ उनका सम्मान किया बल्कि यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को नया हौसला देने में भी कामयाब रहे। हाल ही में यूपीएससी की परीक्षा में सफल रहे पांचों टॉपर्स द्वारा आज यूपीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए टिप्स दिये गए और कई प्रेरणादायी बातें बताई गई, इससे निश्चित रूप से स्टूडेंट्स को नई ताकत मिली है और आगे बढ़ने का जुनून और जोश भी मिला है।
यूपीएससी या स्टेट पीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के मन में बहुत सारे किंतु-परंतु-यद्यपि-अपितु से भरे सवाल होते हैं। बीआईटी के सभागार में परीक्षा की तैयारी के दौरान कई तरह के अंतर्द्वंद से घमासान करते युवाओं को आज कामयाब होने का मंत्र भी मिला और विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने की हिम्मत भी मिली। न कोचिंग जरूरी है, न उच्च संस्थान, न इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई जरूरी है … सोशल मीडिया से दूर रहना बेहद जरूरी है … जैसे कई टिप्स से नई पीढ़ी को सफलता के झंडे गाड़ने में मदद मिलेगी, यह तय है।
इस नायाब पहल के लिए कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे और उनकी टीम बधाई की पात्र है। सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग करने जिले भर का भ्रमण करते रहने के साथ ही प्रतिभावान युवाओं के सपनों को नए पंख देने की कलेक्टर डॉ भुरे की यह कोशिश काफी सार्थक रही। लीक से हटकर किया गया काम हमेशा याद रखा जाता है। कलेक्टर डॉ भुरे की यह पहल भी हमेशा याद रखी जाएगी।
कलेक्टर साहब … आपको साधुवाद …
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