Breaking News

पांच बार विधायक, एक बार सांसद बना अतीक : पुलिस फाइल में दर्ज हैं 101 मुकदमे

द सीजी न्यूज

यूपी के पूर्व सांसद, पांच बार के विधायक अतीक के गुनाहों की लिस्ट काफी लंबी है। अतीक की सियासी उपलब्धियां भी कम नहीं हैं। अतीक को हिस्ट्रीशीटर, बाहुबली, दबंग के साथ आतंक का दूसरा नाम भी कहा जाता था। इन सबके बावजूद पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर सीट से सांसद का चुनाव भी जीता। इसी फूलपुर से कभी देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू लोकसभा का चुनाव लड़ते थे.

अतीक अहमद साल 1989 में पहली बार इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक बना। साल 1991 और 1993 का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़कर विधायक बना। 1996 में इसी सीट पर एसपी ने अतीक को टिकट दिया और वह फिर से विधायक चुना गया। साल 2002 में अपना दल से ही चुनाव लड़कर 5वीं बार विधायक का चुनाव जीता। कहा जाता है कि इलाके में हर बार बूथ कैप्चरिंग होती, लेकिन कोई भी इसकी शिकायत करने प्रशासन के पास नहीं जाता थाAtiq Ahmed: Five times MLA, once became MP Atiq, Raju Pal challenged the emperor

अतीक ने जब सांसद का चुनाव जीता तो अपने भाई अशरफ को अपनी पुरानी सीट शहर पश्चिमी से विधानसभा चुनाव के लिए सपा की टिकट दिला दी। कभी अतीक की टीम का हिस्सा रहे राजू पाल बसपा में शामिल हो गए थे। मायावती ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया। दोनों के बीच कड़ी टक्कर हुई, लेकिन राजू पाल 4 हजार वोटों से चुनाव जीत गए।

25 जनवरी 2005 को शहर पश्चिमी के बसपा विधायक राजू पाल दो गाड़ियों के काफिले के साथ एसआरएन हॉस्पिटल से वापस अपने घर नीवा जा रहे थे। रास्ते में उनके दोस्त सादिक की पत्नी रुखसाना मिली और उन्हें अपने गाड़ी की आगे वाली सीट पर बैठा लिया। राजू पाल खुद क्वालिस ड्राइव कर रहे थे। पीछे वाली सीट पर संदीप यादव और देवीलाल बैठे थे। पीछे स्कॉर्पियो चल रही थी। काफिला सुलेमसराय के जीटी रोड पर था तभी बगल से तेज रफ्तार मारुति वैन राजू पाल की गाड़ी को ओवर टेक करते हुए एकदम सामने आकर खड़ी हो गई। राजू की गाड़ी सड़क किनारे बांस-बल्ली की दुकान पर जाकर भिड़ गई। धड़धड़ाते हुए सामने खड़ी मारुति वैन से पांच हमलावर उतरे। ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। तीन गुंडों ने राजू पाल की गाड़ी को घेरकर फायरिंग शुरू कर दी। दो हमलावर काफिले की दूसरी गाड़ी पर फायरिंग करने लगे। किसी को भी उतरने का मौका नहीं दिया।

हत्या के आरोप के बाद भी सत्ता में बना रहा अतीक

राजू पाल की हत्या में नामजद होने के बावजूद अतीक सत्ताधारी सपा में बना रहा। 2005 में उपचुनाव हुआ। बसपा ने पूजा पाल को उतारा और सपा ने दोबारा अशरफ को टिकट दिया। पूजा पाल के हाथों की मेंहदी भी नहीं उतरी थी। उनकी शादी को महज 9 दिन हुए थे और वो विधवा हो गई, लेकिन पूजा को जनता का समर्थन नहीं मिला। अशरफ चुनाव जीत गया।

विधायकी की आड़ में क्राइम करता रहा अतीक

अतीक धीरे-धीरे एक बड़ा नेता तो बन गया, लेकिन अपनी माफिया वाली छवि से वो कभी बाहर नहीं निकल पाया। नेता बनने के बाद उसके अपराधों की रफ्तार और तेज हो गई। यही वजह है कि उसके ऊपर दर्ज अधिकतर मुकदमे विधायक-सांसद रहते हुए दर्ज हुए।साल 2005 में राजू पाल की हत्या से पहले अतीक पर साल 1989 में चांद बाबा की हत्या, साल 2002 में नस्सन की हत्या, साल 2004 में मुरली मनोहर जोशी के करीबी बताए जाने वाले भाजपा नेता अशरफ की हत्या के आरोप लगे। कहा जाता था कि जो भी अतीक के खिलाफ सिर उठाने की कोशिश करता, मारा दिया जाता। अतीक के खिलाफ अब तक 101 मुकदमे दर्ज हैं।

साल 2007 में जब बसपा की सरकार आई तो हालात बदले। अतीक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। 5 जुलाई 2007 को उमेश ने अतीक, अशरफ समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। खुद इस केस की पैरवी हाई कोर्ट में करते रहे। कहा जाता है कि अशरफ ने ही पूरे हत्याकांड को अंजाम दिया था। उमेश पाल अपहरणकांड में अतीक के साथ अशरफ का नाम आया था। अशरफ और अतीक 2007 में बसपा सरकार बनने के बाद साथ में फरार हुए थे। दोनों भाई साथ में रहते थे।

Check Also

जश्ने ईद मिलादुन्नबी : आज नेअमते उज़्मा कॉन्फ्रेंस, 26 को शान से निकलेगा जुलूसे मोहम्मदी 

THR CG NEWS जिनके आने से रौशन हुए दो जहां,  उनके कदमों की बरकत पर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!