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देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग छत्तीसगढ़ के पतोरा गांव में : सोकपिट संयंत्र से उर्वरक, जल उत्पादन

द सीजी न्यूज

दुर्ग / पतोरा गांव में चल रही जल निकासी परियोजना पूरे देश का ध्यान खींच रही है। यहां सोकपिट में मिट्टी से जैविक उर्वरक और स्वच्छ पानी का उत्पादन करने की एक अत्याधुनिक परियोजना है और देश में अपनी तरह की पहली परियोजना है। इस नवाचार को पतोरा गांव की पंचायत ने अपनाया है। गोवा राज्य से पत्रकारों की टीम ने इस परियोजना की सराहना की है। 

पतोरा की सरपंच अंजीता साहू ने बताया कि गाँव के शौचालयों के मल की निकासी की समस्या थी। इस प्रोजेक्ट ने समस्या का समाधान कर दिया है। इस परियोजना से न केवल खाद का उत्पादन हुआ, बल्कि गांव दुर्गंध मुक्त हो गया है। इस पहल का अनुकरण दूसरी जगहों पर भी किये जाने की तैयारी हो रही है। एफएसटीपी प्लांट पतोरा की गतिविधियों के क्रियान्वयन से देश के सामने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। केंद्र सरकार इस परियोजना को देश के पूरे ग्रामीण इलाकों में लागू करने पर विचार कर रही है।

गोवा राज्य से पत्रकारों की टीम ने ग्राम पंचायत पतोरा और ग्राम पंचायत मंचादुर का निरीक्षण कर ग्राम पंचायत के कार्याें की प्रशंसा की। भारत सरकार द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्रा योजना के तहत छत्तीसगढ़ में विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। गोवा राज्य के पत्रकार यशवन्त बी पाटिल दैनिक गामान्तक, नीरज बांदेकर गोवा न्यूज़ हब, रोहित वाडकर के दल द्वारा गांव का निरीक्षण किया गया। 

परियोजना से उत्पन्न पानी का उपयोग गाँव में फूलों और फलों के बगीचों में छिड़काव के लिए किया जाता है। शौचालयों में मल को अन्यत्र डालने से रोक लगाने से दुर्गंध खत्म हो गई है। यह अनूठी पहल केंद्र सरकार के सहयोग से गैर सरकारी संगठन वाटर एड द्वारा क्रियान्वित की जा रही है। इस योजना को सफल बनाने में पंचायत का बड़ा योगदान है। परियोजना के तहत गांव के शौचालयों से निकलने वाले मल को इकट्ठा कर इसे कहीं और निस्तारित करने के बजाय उचित तरीके से बहाया जाएगा और इससे जैविक खाद और पानी का उत्पादन किया जाएगा।

ग्रामसभा में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित करने हेतु प्रस्ताव पारित किया गया है। वेस्ट बोतल को रिसाइकिल कर पौधे लगाने के लिए किया जा रहा है। पंचायत नें गांव में बर्तन बैंक की व्यवस्था की है। परिवारिक कार्यक्रम होने पर बर्तन निशुल्क दिया जाता है। बर्तन बैंक छत्तीसगढ़ के कई गांवों द्वारा अपनाया गया एक मॉडल है।

ब्लाक दुर्ग के मचांदुर में स्व-सहायता समूह के हाथों के बनाये हुए साबुन, फिनाईल, मशरूम उत्पादन, दीदीयों द्वारा बनाई महिला श्रृंगार की सामग्री उत्पादन की प्रशंसा की गई। समूह की दीदीयों ने बकरी पालन, गाय पालन, कुक्कट पालन का कार्य कर अपनी आजीविका चला रही है। भ्रमण के दौरान राजेश वर्मा, सहायक परियोजना अधिकारी स्वप्न ध्रुव, सहायक परियोजना अधिकारी अरविद ढीढी,  ऋचा शर्मा डी.ई ओ,  प्रवीण वर्मा,  गिरीश माथुरे, गौरव मिश्रा, कार्यक्रम अधिकारी, उपस्थित रहे।

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