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सभी नगरीय निकायों में होगा प्री-ऑडिट : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दिए निर्देश : चालू वित्तीय वर्ष के साथ ही पिछले चार वर्षों का भी होगा पोस्ट ऑडिट

  • नगरीय निकायों में कड़े वित्तीय अनुशासन लागू करने में मिलेगी मदद, भुगतान संबंधी सभी नियमों का पालन होगा सुनिश्चित

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नगरीय निकायों में वित्तीय अनुशासन में कसावट लाने सभी आय-व्ययों के प्री-ऑडिट के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिछली सरकार द्वारा ऑडिट प्रक्रिया बंद कर दिए जाने के कारण ऑडिट से रह गए विगत चार वर्षों की नस्तियों के पोस्ट ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश की सभी 184 नगरीय निकायों के साथ ही नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के यांत्रिकी प्रकोष्ठ और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) का भी ऑडिट कराने को कहा है।

उप मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों में कड़े वित्तीय अनुशासन के लिए प्री-अंकेक्षण-सह-आंतरिक अंकेक्षण की प्रक्रिया को पुनः प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं। उनके निर्देश पर सभी 184 नगरीय निकायों और दो राज्य कार्यालयों, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के यांत्रिकी प्रकोष्ठ और सूडा को भी प्री-अंकेक्षण-सह-आंतरिक अंकेक्षण एवं वैधानिक दायित्व के परिपालन के दायरे में लाते हुए सूडा द्वारा कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्री-अंकेक्षण-सह-आंतरिक अंकेक्षण की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि नगरीय निकायों में अंकेक्षण प्रारंभ होने से सभी भुगतान नस्तियों का परीक्षण प्री-ऑडिट के माध्यम से सीए फर्म द्वारा किया जाएगा। इससे भुगतान संबंधी सभी नियमों का परिपालन सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि अंकेक्षण प्रारंभ होने के बाद पूर्ववर्ती सरकार द्वारा ऑडिट बंद किए जाने के बाद की समस्त नस्तियों का नवीन सीए फर्म की नियुक्ति के बाद पोस्ट ऑडिट कराया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि नगरीय निकायों में वित्तीय अनुशासन की अनिवार्यता और महत्ता को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में प्रथम बार प्री-अंकेक्षण-सह-आंतरिक अंकेक्षण का कार्य वर्ष 2015-16 से प्रारंभ किया गया था। नगर पालिक निगम अधिनियम-1956, नगर पालिका अधिनियम-1961 एवं संबंधित नियम, कार्य विभाग मैन्युअल, भण्डार क्रय नियम तथा राज्य शासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले निकायों में आंतरिक अंकेक्षण के लिए पांच समूहों (Clusters) में पृथक-पृथक अनुभवी चार्टर्ड एकाउन्टेंट एजेंसीज (CA Firms) को आंतरिक अंकेक्षक नियुक्त किया गया था।

निकायों में आंतरिक अंकेक्षण से हुए थे ये लाभ

प्रदेश के नगरीय निकायों में पूर्व में कराए गए आंतरिक अंकेक्षण से कड़े वित्तीय अनुशासन को लागू करने में बहुत मदद मिली थी। प्री-ऑडिट कराए जाने से निकायों में बजट के मद परिवर्तन को रोका गया। विभिन्न निर्माण और प्रदाय कार्यों से संबंधित भुगतान पर नियंत्रण होने से निकायों में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 100 करोड़ रुपए से अधिक की बचत हुई।

सेट-अप के अनुसार स्थापना व्यय के भुगतान की अनुशंसा से अतिरिक्त व्यय पर नियंत्रण हुआ। साथ ही वैधानिक दायित्वों के समय पर निराकरण व भुगतान में सुधार के कारण नगरीय निकायों पर लगने वाले शास्ति में कमी आई थी। इस प्री-ऑडिट के काम को पिछली सरकार द्वारा अक्टूबर-2020 में बंद कर दिया गया था।

निकाय स्तर पर वैधानिक दायित्वों का सामान्यतः पालन किया जाता है। किंतु कुछ कमियों के कारण विभिन्न राजस्व विभागों जैसे जीएसटी, आयकर, पीएफ, ईएसआईसी इत्यादि द्वारा नोटिस एवं मांग पत्र निकायों को भेजे जाते हैं। इससे बचने तथा वैधानिक दायित्वों के सुचारू एवं नियमित परिपालन के लिए नए सीए फर्म्स की नियुक्ति कर प्री-ऑडिट कराया जाएगा। इससे नोटिस और मांग में कमी आएगी और निकायों को अधिरोपित की जानी वाली शास्ति में कमी होगी तथा निकायों के राजस्व में वृद्धि होगी। उप मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सूडा द्वारा प्री-अंकेक्षण-सह-आंतरिक अंकेक्षण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

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